सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अयोध्या राम मंदिर में चंदे की रकम के कथित गबन की स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिकाओं का निपटारा कर दिया। उत्तर प्रदेश सरकार ने कोर्ट को बताया कि विशेष जांच दल (SIT) ने मामले की जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल कर दी है। अब इस मामले की सुनवाई अयोध्या की स्थानीय अदालत में आगे बढ़ेगी।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने याचिकाकर्ताओं को स्थानीय अदालत में चलने वाले मुकदमे में सहयोग करने की अनुमति दी।
पीठ ने स्पष्ट किया कि याचिकाओं का निपटारा करते समय उसने मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की है।
चंदे की गिनती के दौरान रकम के गबन का खुलासा
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि SIT की जांच में मंदिर में प्राप्त चंदे की गिनती के दौरान रकम के गबन की बात सामने आई है।
मेहता के अनुसार, कुछ आरोपियों ने कथित रूप से गबन की गई रकम संपत्तियों में निवेश की, जबकि अन्य ने यह पैसा बैंकों में जमा कर रखा था।
राज्य सरकार की दलीलों को रिकॉर्ड पर लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं का निपटारा कर दिया और मामले की आगे की कार्यवाही अयोध्या की स्थानीय अदालत पर छोड़ दी।
राम मंदिर की जमीन से जुड़ी नई याचिका पर सुनवाई से इनकार
इसी दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक नई याचिका पर विचार करने से भी इनकार कर दिया। इसमें यह निर्धारित करने की मांग की गई थी कि राम मंदिर उसी जमीन पर बना है या नहीं, जिसका फैसला अयोध्या के मुख्य भूमि विवाद में किया गया था।
इससे पहले 21 सितंबर को कोर्ट द्वारा गठित SIT ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वह 25 सितंबर तक अपनी पहली चार्जशीट दाखिल कर देगी।
अब उत्तर प्रदेश सरकार ने चार्जशीट दाखिल होने की पुष्टि कर दी है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिकाओं का निपटारा हो गया है और मामले की सुनवाई स्थानीय अदालत में आगे बढ़ेगी।
