पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की घोषणा के तुरंत बाद वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के बड़े पैमाने पर किए गए तबादलों को लेकर अब कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने शुक्रवार को कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख करते हुए चुनाव आयोग के इस फैसले को चुनौती दी है।
याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पक्षकार बनाया गया है। मामले का उल्लेख मुख्य न्यायाधीश सुजय पॉल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष किया गया, जहां याचिकाकर्ता ने जल्द सुनवाई की मांग की।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग ने राज्य सरकार से परामर्श किए बिना ही इन तबादलों का निर्णय लिया। यह कदम उस समय उठाया गया जब 15 मार्च को राज्य में विधानसभा चुनाव की घोषणा की गई थी।
चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के कुछ ही घंटों के भीतर राज्य के मुख्य सचिव, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सहित कई वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को बदला गया था। इस व्यापक प्रशासनिक फेरबदल ने अब न्यायिक जांच का रूप ले लिया है।
मामले से जुड़े एक वकील के अनुसार, हाईकोर्ट इस याचिका पर अगले सप्ताह की शुरुआत में सुनवाई कर सकता है।
पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव दो चरणों में होंगे—23 अप्रैल और 29 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी।

