पटना हाईकोर्ट ने बिहार के समस्तीपुर जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण कार्य पर लगी रोक को हटाते हुए वक्फ ट्रिब्यूनल के आदेश को निरस्त कर दिया है। अदालत ने कहा कि ट्रिब्यूनल ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर हस्तक्षेप किया था।
न्यायमूर्ति बिबेक चौधुरी की पीठ ने स्पष्ट किया कि ट्रिब्यूनल द्वारा मस्जिद और कब्रिस्तान के रूप में दर्ज भूमि पर अधिग्रहण और निर्माण कार्य रोकना विधि के अनुरूप नहीं था। कोर्ट ने कहा कि ट्रिब्यूनल ने कानून की सही समझ नहीं दिखाई और बिना अधिकार के स्थगन आदेश पारित किया।
यह मामला ट्रिब्यूनल के 15 मई 2025 के उस आदेश से जुड़ा था, जिसमें कुछ भूखंडों पर निर्माण कार्य रोक दिया गया था। ट्रिब्यूनल का मानना था कि वक्फ संपत्ति के अधिग्रहण की प्रक्रिया वक्फ अधिनियम, 1995 के अनुरूप नहीं अपनाई गई।
इस आदेश को चुनौती देते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने दलील दी कि राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 भूमि अधिग्रहण के लिए पूर्ण कानूनी ढांचा प्रदान करता है और इस प्रक्रिया में किसी अन्य कानून के तहत हस्तक्षेप की गुंजाइश नहीं है।
हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम अपने आप में एक संपूर्ण व्यवस्था है, जिसके तहत सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए भूमि अधिग्रहण किया जाता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वक्फ अधिनियम की धारा 91 वक्फ संपत्ति के अधिग्रहण पर रोक नहीं लगाती, बल्कि केवल यह सुनिश्चित करती है कि वक्फ बोर्ड को नोटिस दिया जाए ताकि वह मुआवजा प्रक्रिया में भाग ले सके।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि, “ट्रिब्यूनल द्वारा पारित स्थगन आदेश पूरी तरह से अधिकार क्षेत्र से बाहर है,” और यह भी जोड़ा कि ट्रिब्यूनल कानून की सही व्याख्या करने में विफल रहा।
हाईकोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि इस मामले में पहले पारित कुछ न्यायिक आदेशों ने ट्रिब्यूनल की रोक को व्यावहारिक रूप से अप्रभावी बना दिया था।
इस फैसले के बाद अब समस्तीपुर में संबंधित भूमि पर राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण कार्य आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।

