आगामी विधानसभा चुनावों से पहले प्रस्तावित ‘परिवर्तन यात्रा’ को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी को 1 और 2 मार्च को राज्य के विभिन्न जिलों में राजनीतिक रैलियाँ करने की अनुमति दे दी है। अदालत ने साथ ही कार्यक्रमों के संचालन के लिए कई सख्त शर्तें भी तय की हैं ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।
न्यायमूर्ति सुव्रा घोष ने कहा कि सभा करने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत एक मौलिक अधिकार है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि भले ही आवेदन एक राजनीतिक दल की ओर से दायर किया गया हो, लेकिन उसके पीछे नागरिक ही होते हैं, जिन्हें यह संवैधानिक अधिकार प्राप्त है।
अदालत ने निर्देश दिया कि सभी रैलियाँ दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे के बीच ही आयोजित की जाएँगी और किसी भी समय एक स्थान पर अधिकतम 1,000 लोग ही मौजूद रहेंगे। साथ ही, ऐसे भाषणों पर रोक लगाई गई है जो हिंसा को भड़का सकते हों।
BJP की यह ‘परिवर्तन यात्रा’ राज्यभर में समर्थन जुटाने के उद्देश्य से शुरू की जा रही है। पार्टी के कार्यक्रमों में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के शामिल होने की योजना है।
हाईकोर्ट ने पार्टी को निर्देश दिया कि वह 20 स्वयंसेवकों के नाम और उनके मोबाइल नंबर शुक्रवार शाम 6 बजे तक पुलिस को उपलब्ध कराए। ये स्वयंसेवक कार्यक्रम के दौरान पुलिस के साथ लगातार संपर्क में रहेंगे और किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में जिम्मेदार माने जाएँगे।
अदालत ने राज्य प्रशासन को भी निर्देश दिया कि प्रत्येक कार्यक्रम स्थल के आसपास पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात किया जाए ताकि शांति व्यवस्था बनाए रखी जा सके।
सुनवाई के दौरान BJP की ओर से दलील दी गई कि दुर्गापुर में रैली की अनुमति मिल चुकी है, लेकिन अन्य जिलों में अभी स्वीकृति नहीं दी गई है, जो सभा के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। राज्य की ओर से कहा गया कि यह अधिकार पूर्ण नहीं है और जनसुरक्षा के हित में उस पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करते हुए अदालत ने नियंत्रित शर्तों के साथ रैलियों की अनुमति देकर मौलिक अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की।

