संस्थागत मध्यस्थता को मजबूत बनाने के लिए भरोसा, क्षमता और प्रशिक्षित पेशेवर जरूरी: अहमदाबाद में GHAC की आधारशिला रखते हुए बोले CJI सूर्यकांत

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि भारत में मध्यस्थता व्यवस्था ने काफ़ी प्रगति की है, लेकिन संस्थागत ढांचे को विश्वसनीय बनाने, उसकी क्षमता बढ़ाने और प्रशिक्षित मध्यस्थों की एक मजबूत श्रृंखला तैयार करने की दिशा में अभी गंभीर काम बाकी है। वे अहमदाबाद में गुजरात हाईकोर्ट आर्बिट्रेशन सेंटर (GHAC) की आधारशिला रखने के बाद संबोधित कर रहे थे।

CJI ने कहा कि हाल के वर्षों में मध्यस्थता कानून में हुए संशोधनों ने न्यायालयी हस्तक्षेप को सीमित किया है, कार्यवाही को समयबद्ध बनाया है और मध्यस्थों की नियुक्ति में निष्पक्षता पर जोर दिया है। साथ ही, न्यायिक फैसलों ने पक्षकारों की स्वायत्तता को मजबूत किया और कई कानूनी अस्पष्टताओं को स्पष्ट किया है। इससे यह संकेत मिलता है कि भारत की मध्यस्थता प्रणाली परिपक्व हो रही है।

इसके बावजूद उन्होंने कहा कि संस्थागत मध्यस्थता का उपयोग अभी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंचा है। बड़ी संख्या में वाणिज्यिक विवाद अब भी एड-हॉक मध्यस्थता या अदालतों के माध्यम से निपटाए जा रहे हैं और कई संस्थागत मामलों के लिए विदेशी मंचों को प्राथमिकता दी जाती है। उनके अनुसार असली चुनौती यह है कि क्या भारतीय संस्थान पक्षकारों का भरोसा जीत पा रहे हैं।

भरोसे के सवाल पर उन्होंने कहा कि निष्पक्ष नियुक्ति, प्रक्रिया की पारदर्शिता और अवार्ड के प्रभावी क्रियान्वयन से ही विश्वास बनता है। केवल नियम बनाने से नहीं, बल्कि लगातार निष्पक्ष और पारदर्शी कामकाज से ही संस्थानों की साख बनती है।

क्षमता को दूसरी बड़ी चुनौती बताते हुए CJI ने कहा कि देश में वाणिज्यिक विवादों की संख्या के मुकाबले संस्थागत मध्यस्थता बहुत कम है। कई पक्षकार इसलिए संस्थानों से दूर रहते हैं क्योंकि उन्हें यह स्पष्ट नहीं दिखता कि संस्थागत ढांचा अतिरिक्त मूल्य कैसे देता है। उन्होंने कहा कि बेहतर बुनियादी ढांचा, पैनल आधारित मध्यस्थ, मजबूत केस मैनेजमेंट और सक्षम प्रशासनिक व्यवस्था संस्थानों की प्रासंगिकता तय करेंगे।

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तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण चुनौती उन्होंने पेशेवर प्रशिक्षण की बताई। उनके अनुसार मध्यस्थता एक विशिष्ट विशेषज्ञता है, जिसमें कानूनी समझ के साथ वाणिज्यिक वास्तविकताओं और केस प्रबंधन की दक्षता भी जरूरी होती है। उन्होंने प्रशिक्षित मध्यस्थों की निरंतर आपूर्ति के लिए संगठित प्रशिक्षण व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि भारत को अपनी प्रगति का मूल्यांकन वैश्विक मध्यस्थता केंद्रों के मानकों और उन पक्षकारों की अपेक्षाओं के आधार पर करना चाहिए, जो मुकदमेबाजी के बेहतर विकल्प के रूप में मध्यस्थता चुनते हैं।

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GHAC की नई इमारत में 16 आर्बिट्रेशन कॉन्फ्रेंस रूम, सात मध्यस्थता कक्ष और ऑनलाइन विवाद निपटान की सुविधा होगी, जिससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों प्रकार के मामलों को संभाला जा सकेगा। इस अवसर पर “Institutional Arbitration at Crossroads: Challenges and the Way Forward” विषय पर दो दिवसीय सम्मेलन भी आयोजित किया गया है, जिसमें मध्यस्थ, अधिवक्ता और अन्य हितधारक भाग ले रहे हैं।

कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने राज्य में औद्योगिक और तकनीकी विकास के संदर्भ में संस्थागत मध्यस्थता की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला।

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