उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भीमताल स्थित ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी की 18 वर्षीय छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। जस्टिस राकेश थपलियाल ने इस बात पर भी जवाब मांगा है कि आखिर किन कारणों से स्थानीय प्रशासन ने परिवार की शुरुआती शिकायत पर मामला दर्ज नहीं किया, जिसके चलते पीड़ित परिवार को दूसरे राज्य में जाकर कानूनी मदद लेनी पड़ी।
यह आदेश छात्रा के पिता द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान आया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में रहने वाली बीसीए सेकंड ईयर की छात्रा ने सीनियर छात्रों द्वारा रैगिंग किए जाने की शिकायत की थी और वह इन घटनाओं से काफी तनाव में थी।
लखनऊ की रहने वाली यह छात्रा भीमताल कैंपस में पढ़ाई कर रही थी। पिछले साल वह अपने हॉस्टल के कमरे में अचेत अवस्था में मिली थी। याचिकाकर्ता के अनुसार, कॉलेज प्रबंधन ने उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। कॉलेज अधिकारियों ने इस घटना को “संदिग्ध परिस्थितियों” में हुई मौत बताया था। पिता का आरोप है कि कॉलेज के गेट के सीसीटीवी फुटेज में उनकी बेटी के साथ छेड़छाड़ होती दिख रही है।
याचिका में भवाली पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। पिता का आरोप है कि कॉलेज प्रबंधन के दबाव में स्थानीय पुलिस ने उनकी शिकायत दर्ज करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद परिवार को लखनऊ पुलिस की शरण लेनी पड़ी, जहां ‘जीरो एफआईआर’ दर्ज की गई। नियमानुसार, लखनऊ पुलिस ने मामले को आगे की जांच के लिए भवाली थाने स्थानांतरित कर दिया, लेकिन याचिकाकर्ता का दावा है कि वहां अब भी जांच में ढिलाई बरती जा रही है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस राकेश थपलियाल ने राज्य सरकार से पूछा कि परिवार की पहली शिकायत पर तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं की गई? कोर्ट ने जांच की वर्तमान स्थिति और पुलिस की लापरवाही के कारणों पर स्पष्टता मांगी है। हाईकोर्ट ने अब राज्य को जांच रिपोर्ट और भवाली पुलिस के आचरण पर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल को तय की गई है।

