तेलंगाना हाईकोर्ट ने ब्रह्मोस के महानिदेशक पद पर जयतीर्थ आर. जोशी की नियुक्ति को बहाल रखते हुए सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) के आदेश को निरस्त कर दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि कैट ने शीर्ष रक्षा पद पर की गई नियुक्ति को रद्द करके न्यायिक समीक्षा की तय कानूनी सीमाओं का उल्लंघन किया था।
न्यायमूर्ति पी. सैम कोशी और न्यायमूर्ति नरसिंग राव नंदीकोंडा की खंडपीठ ने केंद्र सरकार और जयतीर्थ आर. जोशी की ओर से दायर याचिकाओं को स्वीकार करते हुए मंगलवार को यह निर्णय सुनाया।
वरिष्ठता को लेकर शुरू हुआ था विवाद
केंद्र सरकार ने नवंबर 2024 में जयतीर्थ आर. जोशी को ब्रह्मोस का महानिदेशक नियुक्त किया था। इस फैसले को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के उत्कृष्ट वैज्ञानिक (डिस्टिंग्विश्ड साइंटिस्ट) शिवसुब्रमण्यम नम्बी नायडू ने कैट में चुनौती दी। नायडू का तर्क था कि वह सेवा में जोशी से वरिष्ठ हैं, इसलिए नियमानुसार महानिदेशक पद पर उनकी नियुक्ति होनी चाहिए थी।
नायडू की याचिका पर सुनवाई करते हुए कैट ने पिछले वर्ष 29 दिसंबर को जोशी की नियुक्ति निरस्त कर दी थी। साथ ही अधिकरण ने केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को निर्देश दिया था कि वे इस पद के लिए नायडू की दावेदारी पर दोबारा विचार करें।
हाईकोर्ट में दलीलें और फैसला
कैट के फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार और जोशी ने तेलंगाना हाईकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट ने इस वर्ष जनवरी में ट्रिब्यूनल के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी।
अदालत में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने दलील दी कि कैट का आदेश पूरी तरह से विधि-विरुद्ध था और अधिकरण ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर हस्तक्षेप किया। दूसरी ओर, नायडू के वकील ने कहा कि केंद्र सरकार यह साबित करने में असमर्थ रही कि महानिदेशक पद के पात्र वैज्ञानिकों में जोशी ही सबसे उपयुक्त उम्मीदवार क्यों थे।
दोनों पक्षों की विस्तृत बहस सुनने के बाद हाईकोर्ट ने जुलाई में अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था, जिसे मंगलवार को याचिकाकर्ताओं के पक्ष में जारी किया गया।

