हाईकोर्ट परिसर की दीवारों पर चुनावी पोस्टर-स्टिकर चिपकाए जाने और चुनाव प्रचार के दौरान होने वाली अव्यवस्था पर कड़ा रुख अपनाते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने स्वतः संज्ञान लेते हुए एक नई जनहित याचिका दर्ज की है। जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने ‘इन रे: कंडक्ट ऑफ इलेक्शंस टू द अवध बार एसोसिएशन’ शीर्षक से इस मामले की सुनवाई करते हुए उम्मीदवारों द्वारा हाईकोर्ट परिसर के भीतर जुलूस निकालने, खाद्य सामग्री बांटने और परिसर सहित बाहर 100 मीटर के दायरे में पर्चे व हैंडबिल वितरित करने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन निर्देशों का उल्लंघन करने वाले प्रत्याशियों को चुनाव लड़ने से अयोग्य (डिबार) घोषित किया जा सकता है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला पहले से निस्तारित हो चुकी एक जनहित याचिका, डब्ल्यूपीआईएल संख्या 177/2026 (मिथिलेश श्रीवास्तव बनाम अवध बार एसोसिएशन) में दाखिल संशोधन प्रार्थना पत्र (सी. एम. प्रार्थना पत्र संख्या 5/2026) के जरिए सामने आया था। इस अर्जी में मांग की गई थी कि अवध बार एसोसिएशन की प्रबंध समिति के विभिन्न पदों के लिए चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों को हाईकोर्ट परिसर के अंदर या बाहर पोस्टर, बैनर और होर्डिंग लगाने, टेंट लगाकर रास्ते बाधित करने तथा मतदान के दिन परिसर में खान-पान की वस्तुएं बांटने से रोका जाए।
पीठ ने रेखांकित किया कि उम्मीदवार लखनऊ स्थित हाईकोर्ट परिसर के अंदर और बाहर स्टिकर व पोस्टर चिपका रहे हैं, जिससे न केवल इमारत और परिसर की सुंदरता खराब हो रही है, बल्कि यह कानूनी रूप से भी अस्वीकार्य है। चूंकि मूल याचिका पहले ही तय हो चुकी थी, इसलिए खंडपीठ ने प्रार्थना पत्र के तथ्यों और सूचनाओं के आधार पर इसे एक नई स्वतः संज्ञान जनहित याचिका के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया।
वकीलों और पक्षों की दलीलें
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता कु. विश्व मोहिनी, जान लक्ष्मी तिवारी सेनानी और राजेश कुमार उपस्थित हुए।
सुनवाई के दौरान चुनाव अधिकारी (रिटर्निंग ऑफिसर) श्री आर.बी.एस. राठौर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए। उन्होंने पीठ को अवगत कराया कि उन्होंने उम्मीदवारों को परिसर के अंदर व बाहर दीवारों पर पोस्टर और स्टिकर न चिपकाने के संबंध में खुद कई नोटिस जारी किए हैं, लेकिन स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ है।
बार के सदस्यों, जिनमें अधिवक्ता श्री संजय मिश्रा और याचिकाकर्ता की वकील कु. विश्व मोहिनी शामिल थीं, ने अदालत से तुरंत न्यायिक हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया। उन्होंने बताया कि रिटर्निंग ऑफिसर और वरिष्ठ वकीलों की समझाइश व सलाह का चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों पर कोई असर नहीं हो रहा है।
इसके अलावा बार के सदस्यों ने पिछले चुनाव की तरह ‘नो योर कैंडिडेट’ (केवाईसी) कार्यक्रम आयोजित करने का सुझाव दिया, ताकि उम्मीदवार सदस्यों को सीधे संबोधित कर सकें और मतदाता सही फैसला ले सकें। साथ ही यह सुझाव भी आया कि व्यक्तिगत उम्मीदवारों द्वारा खानपान बांटने पर रोक लगाने के लिए रिटर्निंग ऑफिसर या एल्डर्स कमेटी बार फंड से मतदान के दिन मतदाताओं के लिए अल्पाहार की व्यवस्था करे। श्री राठौर ने कहा कि वे एल्डर्स कमेटी से विचार-विमर्श कर केवाईसी और खानपान की व्यवस्था पर विचार करेंगे और जरूरी कदम उठाएंगे।
अदालती नजीरें और हाईकोर्ट का विश्लेषण
खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा अमित सचान बनाम बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश, लखनऊ (एआईआर ऑनलाइन 2021 एससी 1260) में दिए गए फैसले का उल्लेख किया। यह मामला लखनऊ खंडपीठ द्वारा पीआईएल संख्या 18055/2021 में 24 अगस्त 2021 और 27 अगस्त 2021 को पारित आदेशों के खिलाफ दाखिल विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) खारिज होने से जुड़ा था।
हाईकोर्ट ने 24 अगस्त 2021 के आदेश के पैरा 24 में जारी निर्देशों को दोहराया, जिसमें कहा गया था:
“(IV) अवध बार एसोसिएशन की एल्डर्स कमेटी आज की गई सिफारिशों और निर्देशों को ध्यान में रखते हुए चुनावों के लिए ‘आचार संहिता’ तैयार करेगी।
(V) अवध बार एसोसिएशन के चुनावों में विजिटिंग कार्ड/कार्ड, पर्चे या पोस्टर बांटकर प्रचार करने पर प्रतिबंध होना चाहिए। चुनाव से पहले या चुनाव के दौरान लंच पैकेट, अल्पाहार आदि के वितरण की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए और जो भी ऐसी चीजें बांटते पाए जाएं, उन्हें चुनाव लड़ने से रोक दिया जाना चाहिए। चुनाव प्रचार के लिए डिनर पार्टियों के आयोजन पर रोक होनी चाहिए।
(VI) वरिष्ठ रजिस्ट्रार या एल्डर्स कमेटी के परामर्श से उनके द्वारा नामित कोई अन्य अधिकारी, अवध बार एसोसिएशन के ऐसे सदस्यों को आगामी चुनाव में भाग लेने से रोकेगा, जो शिकायतों के उचित सत्यापन और वीडियो क्लिपिंग व उपलब्ध अन्य साक्ष्यों के अवलोकन के बाद, 14.8.2021 को मतदान प्रक्रिया के दौरान दुर्व्यवहार करने और चुनाव प्रक्रिया में बाधा डालने में लिप्त पाए जाएं।”
पीठ ने अमित सचान फैसले के पैरा 3.2 में उद्धृत सुप्रीम कोर्ट के एक अन्य निर्णय, आर. मुथुकृष्णन बनाम रजिस्ट्रार जनरल, मद्रास हाईकोर्ट [(2019) 16 एससीसी 407] के पैरा 31 का भी हवाला दिया:
“31. कोर्ट परिसर में जुलूस निकालने, कोर्ट में नारेबाजी करने, लाउडस्पीकर का उपयोग करने, जजों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करने या कोर्ट के शांतिपूर्ण, सम्मानजनक और गरिमापूर्ण कामकाज में किसी भी प्रकार का व्यवधान पैदा करने की कोई गुंजाइश नहीं है। इसकी पवित्रता किसी पवित्र स्थल से कम नहीं है, जो श्रेष्ठ आत्माओं के लिए आरक्षित है। हम यह देखकर स्तब्ध हैं कि मद्रास हाईकोर्ट के परिसर में अधिवक्ताओं के घोर दुर्व्यवहार की घटनाओं के कारण कोर्ट की सुरक्षा, गरिमा और कानून के शासन को बनाए रखने के लिए सीआईएसएफ को बुलाना पड़ा। इस कोर्ट द्वारा महिपाल सिंह राणा [महिपाल सिंह राणा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, (2016) 8 एससीसी 335] के मामले में यह पाया गया है कि बार काउंसिल अनुशासनात्मक मोर्चे पर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में विफल रही है। हमारी राय में, यदि ऐसी स्थिति जारी रहती है और बार काउंसिल अपने कर्तव्यों का पालन करने में विफल रहती है, तो कोर्ट को इसके कामकाज की निगरानी करनी होगी और उचित अनुमेय आदेश पारित करने होंगे। बार और बेंच दोनों की स्वतंत्रता सर्वोच्च है, इनके बीच परस्पर संतुलन होना चाहिए।”
इन कानूनी सिद्धांतों के आधार पर हाईकोर्ट ने माना कि जब नियामक संस्थाएं अपनी जिम्मेदारी निभाने में पीछे रह जाती हैं, तो संस्थान की गरिमा और शांतिपूर्ण कार्यप्रणाली की रक्षा के लिए अदालत को आगे आकर जरूरी निर्देश देने होते हैं।
हाईकोर्ट का निर्णय और कड़े निर्देश
वर्ष 2026-27 के आगामी चुनावों के लिए 2021 के निर्देशों को अनिवार्य बताते हुए खंडपीठ ने निम्नलिखित कड़े आदेश पारित किए:
- जांच और वीडियोग्राफी: लखनऊ स्थित हाईकोर्ट के सीनियर रजिस्ट्रार को निर्देश दिया गया है कि वे परिसर के अंदर और बाहर की फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी कराकर जांच करें और दीवारों पर चिपकाए गए पोस्टरों व स्टिकरों के आधार पर संबंधित उम्मीदवारों के नामों की विस्तृत रिपोर्ट अदालत में पेश करें।
- प्रचार सामग्री तुरंत हटाने का आदेश: जिन भी प्रत्याशियों के पोस्टर या स्टिकर परिसर के भीतर या बाहर लगे हैं, वे उन्हें तुरंत हटाएं। ऐसा न करने पर पूर्व आदेशों के तहत उन्हें चुनाव लड़ने से अयोग्य (डिबार) किया जा सकता है।
- जुलूस, भोजन वितरण और पर्चों पर रोक: कोई भी प्रत्याशी चुनाव के सिलसिले में हाईकोर्ट परिसर में जुलूस नहीं निकालेगा और न ही खान-पान की चीजें बांटेगा। इसके अतिरिक्त हाईकोर्ट परिसर के अंदर और बाहर 100 मीटर के दायरे में किसी भी सदस्य को हैंडबिल या पर्चे बांटने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
- उल्लंघन पर कार्रवाई: इन निर्देशों का उल्लंघन करने पर उम्मीदवार को चुनाव से बाहर किया जा सकता है तथा बार काउंसिल को मामला भेजने जैसी अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
- पक्षकार बनाने और नोटिस का निर्देश: अदालत ने अपने कार्यालय को निर्देश दिया कि यूपी बार काउंसिल (प्रयागराज), अवध बार एसोसिएशन की एल्डर्स कमेटी और रिटर्निंग ऑफिसर को इस मामले में विपक्षी पक्षकार के रूप में शामिल किया जाए। आदेश की प्रति नोटिस बोर्ड पर लगाने के लिए एल्डर्स कमेटी के चेयरमैन को भेजने का निर्देश दिया गया।
- कॉज लिस्ट में नाम दर्ज करने का आदेश: कोर्ट ने निर्देश दिया कि मामले की अगली सुनवाई पर यूपी बार काउंसिल के अधिवक्ता श्री सुभाष चंद्र पांडे का नाम दैनिक वाद सूची (कॉज लिस्ट) में प्रकाशित किया जाए।
हाईकोर्ट ने इस जनहित याचिका को 29 सितंबर 2026 को डब्ल्यूपीआईएल संख्या 18055/2021 के साथ नए मामले के रूप में सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है।
मामले का विवरण
मामले का शीर्षक: मिथिलेश श्रीवास्तव बनाम अवध बार एसोसिएशन, थ्रू इट्स जनरल सेक्रेटरी (स्वतः संज्ञान पीआईएल: इन रे: कंडक्ट ऑफ इलेक्शंस टू द अवध बार एसोसिएशन)
वाद संख्या: जनहित याचिका (पीआईएल) संख्या 177/2026 (सी. एम. प्रार्थना पत्र संख्या 5/2026)
पीठ: जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला

