‘जूस के पैकेट में वोदका!’ टेट्रा पैक और पाउच में शराब की बिक्री पर रोक की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

देश में टेट्रा पैक और पाउच (सैशे) में शराब की बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार को देश की सर्वोच्च अदालत ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

यह आदेश मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पांचोली की तीन सदस्यीय पीठ ने दिया। अदालत ‘कम्युनिटी अगेंस्ट ड्रंकन ड्राइविंग’ (CADD) नामक गैर-सरकारी संगठन द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें बच्चों के स्वास्थ्य और आबकारी नियमों में खामियों का मुद्दा उठाया गया है।

क्या है पूरा मामला?

याचिकाकर्ता संस्था ‘कम्युनिटी अगेंस्ट ड्रंकन ड्राइविंग’ ने बाजार में कांच की बोतलों के बजाय लचीली पैकेजिंग जैसे टेट्रा पैक और प्लास्टिक पाउच में बिक रही शराब को लेकर चिंता जताई है। याचिका में दलील दी गई है कि इस तरह की पैकेजिंग न केवल स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है, बल्कि यह आम उपभोक्ताओं और विशेष रूप से नाबालिग बच्चों को भ्रमित कर रही है।

पैकेट का आकार और स्वरूप सामान्य रूप से बिकने वाले फ्रूट जूस या कोल्ड ड्रिंक्स जैसा होने के कारण बच्चे इसे अनजाने में खरीद सकते हैं। इस खतरे को रोकने के लिए याचिका में मांग की गई है कि केंद्र सरकार सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एक समान नीति बनाए, जिसके तहत इस तरह की पैकेजिंग पर तुरंत देशव्यापी प्रतिबंध लगाया जाए।

अदालत में याचिकाकर्ता की दलीलें

याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील विपिन नायर ने कोर्ट को बताया कि मौजूदा आबकारी नियमों (Excise Regimes) के तहत ‘बोतल’ की कानूनी परिभाषा बेहद “अस्पष्ट” है। इसी खामी का फायदा उठाकर कंपनियां किसी भी तरह की पैकेजिंग में शराब बेच रही हैं, जिसे रोकने के लिए तुरंत एक राष्ट्रीय मानक तय करने की आवश्यकता है।

READ ALSO  आतिशी ने अंतरिम आधार पर दिल्ली सरकार के स्थायी वकील की नियुक्ति के आदेश को 'अमान्य' घोषित किया

भ्रामक पैकेजिंग के सीधे खतरे को कोर्ट के सामने रखते हुए वकील विपिन नायर ने कहा:

“वे फलों के रस (फ्रूट जूस) और शराब के बीच का फर्क मिटा रहे हैं। पैकेट के ऊपर सेब की तस्वीर छपी होती है, लेकिन उसके अंदर वोदका भरी होती है।”

नायर ने दलील दी कि शराब को बच्चों के पीने वाले जूस पैकेट की तरह बेचना जनहित और सार्वजनिक स्वास्थ्य के साथ एक बड़ा खिलवाड़ है। उन्होंने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा करना राज्य (सरकार) का प्राथमिक और मौलिक कर्तव्य है।

याचिका में क्या मांगें की गई हैं?

याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से मुख्य रूप से दो महत्वपूर्ण निर्देश देने की अपील की है:

  1. राष्ट्रव्यापी प्रतिबंध के लिए नीति: केंद्र सरकार को एक ऐसी व्यापक नीति तैयार करने का निर्देश दिया जाए जो सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू हो, ताकि टेट्रा पैक और सैशे (पाउच) में शराब की बिक्री पर तुरंत रोक लगाई जा सके।
  2. ‘बॉटलिंग’ की परिभाषा में संशोधन: केंद्र सरकार राज्यों को निर्देश दे कि वे अपने आबकारी नियमों और अधिनियमों में तत्काल बदलाव करें। इसके तहत ‘बॉटलिंग’ की एक समान परिभाषा तय की जाए, जिसके अंतर्गत शराब को केवल कांच की बोतलों या स्पष्ट रूप से अलग दिखने वाले विशेष पात्रों में ही बेचने की अनुमति दी जाए।
READ ALSO  CJI Gavai Criticises SC Bar Associations for Not Organising Farewell for Justice Bela Trivedi

अदालत का फैसला

याचिकाकर्ता के वकील की प्रारंभिक दलीलें सुनने के बाद, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले को विचार योग्य माना। अदालत ने औपचारिक रूप से नोटिस जारी कर केंद्र सरकार और अन्य प्रतिवादियों से इस मुद्दे पर उनका पक्ष और जवाब मांगा है।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles