कर्नाटक हाईकोर्ट ने नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ 52 आपराधिक मामलों की वापसी पर लगाई अंतरिम रोक

कर्नाटक हाईकोर्ट ने गुरुवार को राज्य सरकार के उस फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी, जिसके तहत नेताओं, प्रो-कन्नड़ कार्यकर्ताओं, किसान नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज 52 आपराधिक मामलों को वापस लेने का निर्णय लिया गया था। इन मामलों में कलबुर्गी जिले में लाडले मशाक दरगाह हिंसा से जुड़ा मामला भी शामिल है।

मुख्य न्यायाधीश विभू बाखरू और न्यायमूर्ति के.एस. हेमलेखा की खंडपीठ ने राज्य सरकार के 27 मई 2026 के आदेश को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश पारित किया।

हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार का आदेश अगले आदेश तक प्रभावी नहीं रहेगा। साथ ही राज्य सरकार को अपना जवाब दाखिल करने का समय दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।

मामलों की वापसी को दी गई चुनौती

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता वेंकटेश दलवाई ने दलील दी कि आपराधिक मामलों को वापस लेने का निर्णय तीन वरिष्ठ मंत्रियों की सिफारिशों के आधार पर लिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार का यह फैसला वर्ष 2025 में इसी तरह के एक मामले में हाईकोर्ट द्वारा दिए गए आदेश के विपरीत है।

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राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता तारानाथ पूजारी ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा।

गृह विभाग और अभियोजन विभाग को नोटिस

खंडपीठ ने गृह विभाग तथा अभियोजन एवं सरकारी वाद विभाग को नोटिस जारी करते हुए राज्य सरकार को अपने जवाब के साथ आपत्तियां दाखिल करने का निर्देश दिया।

स्वास्थ्य मंत्री को पक्षकार बनाने से किया इनकार

हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य मंत्री यू.टी. खादर को इस जनहित याचिका में तीसरे प्रतिवादी के रूप में नोटिस जारी करने से इनकार कर दिया।

पीठ ने कहा कि विधानसभा के पटल पर विधायकों द्वारा दिए गए वक्तव्यों को कानूनी विशेषाधिकार प्राप्त होता है। केवल ऐसे वक्तव्यों के आधार पर किसी विधायक को इस प्रकार की कार्यवाही में प्रतिवादी नहीं बनाया जा सकता।

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याचिकाकर्ता के वकील ने मंत्री को प्रतिवादी बनाए जाने का औचित्य बताने का प्रयास किया, लेकिन अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया।

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