KDMC की कचरा गाड़ी से 12 वर्षीय बच्चे की मौत, मां को ₹5 लाख मुआवजा देने का MACT का आदेश

ठाणे जिले के मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) ने मई 2021 में कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (KDMC) की कचरा गाड़ी से कुचलकर जान गंवाने वाले 12 वर्षीय बच्चे की मां को ₹5 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया है। इस राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा।

MACT सदस्य आर वी मोहिते ने सोमवार को द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को मुआवजे की राशि जमा करने का निर्देश दिया। साथ ही बीमा कंपनी को पूरी रकम KDMC के नगर आयुक्त से वसूलने की अनुमति दी गई, क्योंकि अधिकरण ने बीमा पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन पाया।

अधिकरण ने पाया कि दुर्घटना के समय कचरा गाड़ी का फिटनेस सर्टिफिकेट वैध नहीं था और चालक के पास भी वैध ट्रांसपोर्ट श्रेणी का ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था।

कल्याण में हुआ था हादसा

मामले के अनुसार, 12 वर्षीय अमित जगदीश धाकड़ 22 मई 2021 को कल्याण में एक आवासीय इमारत के सामने सड़क पर खेल रहा था। इसी दौरान तेज रफ्तार से पीछे ली जा रही KDMC की कचरा गाड़ी ने उसे टक्कर मार दी। हादसे में उसे गंभीर चोटें आईं और उसकी मौत हो गई।

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KDMC ने अधिकरण के सामने कहा कि वाहन चालक निजी ठेकेदार विशाल एक्सपर्ट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ने उपलब्ध कराया था। नगर निगम ने कोविड-19 महामारी के दौरान वाहन फिटनेस और ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता बढ़ाने से संबंधित सरकारी प्रस्तावों का भी हवाला दिया।

हालांकि, RTO रिकॉर्ड से सामने आया कि वाहन का फिटनेस सर्टिफिकेट 10 मार्च 2013 को ही समाप्त हो गया था और उसका नवीनीकरण नहीं कराया गया। चालक के ट्रांसपोर्ट श्रेणी के ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता भी 13 अगस्त 2019 को समाप्त हो चुकी थी।

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अधिकरण ने कहा कि चालक का लाइसेंस कोविड लॉकडाउन लागू होने से काफी पहले समाप्त हो गया था। इस अवधि में उसका नवीनीकरण नहीं कराया गया। इसलिए महामारी के दौरान जारी सरकारी छूट का लाभ इस मामले में नहीं दिया जा सकता।

अधिकरण ने माना कि चालक ने बिना वैध लाइसेंस और बिना वैध फिटनेस सर्टिफिकेट के वाहन चलाया, जिससे बीमा पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन हुआ।

KDMC जिम्मेदारी से नहीं बच सकता

अधिकरण ने यह भी कहा कि वाहन का मालिक होने के नाते KDMC से यह अपेक्षा थी कि वह निजी ठेकेदार द्वारा उपलब्ध कराए गए चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस की जांच करे।

अधिकरण ने पाया कि KDMC ने ऐसी किसी जांच की रिपोर्ट रिकॉर्ड पर पेश नहीं की। केवल यह कहने से कि चालक निजी ठेकेदार ने उपलब्ध कराया था, नगर निगम तीसरे पक्ष के दुर्घटना दावे में अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता।

मुआवजे की गणना के लिए अधिकरण ने बच्चे की अनुमानित वार्षिक आय ₹30,000 मानी और 15 का मल्टीप्लायर लागू किया। इसके साथ अन्य निर्धारित मदों को जोड़कर कुल मुआवजा ₹5 लाख तय किया गया।

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बीमा कंपनी को याचिका दाखिल किए जाने की तारीख से 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित ₹5 लाख की राशि एक महीने के भीतर अधिकरण के बैंक खाते में जमा करने का निर्देश दिया गया है। इसके बाद यह रकम सीधे दावेदार के खाते में ट्रांसफर की जाएगी।

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