दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार, 1 अक्टूबर को आतंकी गतिविधियों से जुड़े एक मामले में मोहम्मद शहजाद कमाल को जमानत दे दी। कमाल पर प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन आईएसआईएस (ISIS) से संबद्ध समूह ‘हरकत-उल-हर्ब-ए-इस्लाम’ का सदस्य होने का आरोप है।
जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस अरुण भारद्वाज की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा, “जमानत मंजूर की जाती है।” हाईकोर्ट के इस फैसले की विस्तृत प्रति अभी प्रतीक्षित है।
निचली अदालत के आदेश को दी थी चुनौती
कमाल ने ट्रायल कोर्ट की ओर से राहत न मिलने के बाद हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी। निचली अदालत ने 29 मई 2024 को उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने उसे 31 अगस्त 2021 को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद से वह लगातार न्यायिक हिरासत में था।
एनआईए के आरोप और आतंकी फंडिंग का मामला
यह मामला मूल रूप से एनआईए द्वारा वर्ष 2018 में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के कड़े प्रावधानों के तहत दर्ज किया गया था।
जांच एजेंसी के अनुसार, कमाल ने अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर देश में आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देने की आपराधिक साजिश रची थी। एनआईए का आरोप है कि उसने आईएसआईएस से जुड़े आतंकी गिरोह ‘हरकत-उल-हर्ब-ए-इस्लाम’ की “जिहादी गतिविधियों” के संचालन के लिए कई मौकों पर जानबूझकर धन जुटाया और वित्तीय सहायता मुहैया कराई थी।

