कावेरी जल विवाद: तमिलनाडु की याचिका पर 17 अगस्त को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

कर्नाटक से कावेरी नदी का पानी तुरंत छोड़ने की मांग को लेकर तमिलनाडु सरकार द्वारा दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट अब 17 अगस्त को सुनवाई करेगा। मुख्य न्यायाधीश सूर्या कांत ने बुधवार को यह जानकारी दी। इससे पहले इस मामले पर गुरुवार, 13 अगस्त को सुनवाई होनी तय की गई थी।

सुनवाई टलने का कारण

चीफ जस्टिस सूर्या कांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता पी. विल्सन ने किसानों की ओर से दायर एक अलग याचिका पर जल्द सुनवाई का अनुरोध किया था। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि मामला पहले जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने सूचीबद्ध था, लेकिन उनके अस्वस्थ होने के कारण सुनवाई को आगे बढ़ाना पड़ा है।

तमिलनाडु का रुख और कम पानी का दावा

जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार ने 3 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए कर्नाटक को तुरंत पानी रिलीज करने का निर्देश देने की गुहार लगाई थी। इस मामले में द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (डीएमके) और स्थानीय किसान संगठनों ने भी अर्जियां दी हैं। तमिलनाडु का तर्क है कि कम बारिश वाले इस साल में उसे अपने वैधानिक हिस्से का पानी नहीं मिल पा रहा है।

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नियमन समिति के निर्देश का उल्लंघन

राज्य सरकार के अनुसार, कावेरी जल नियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) ने 28 जुलाई की बैठक में कर्नाटक को 29 जुलाई से अगले 15 दिनों तक रोजाना 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद, 29 जुलाई से 2 अगस्त के बीच बिलिगुंडलू गेज स्टेशन पर केवल 158 से 550 क्यूसेक पानी ही दर्ज किया गया, जो तय मात्रा से बेहद कम है।

जलाशयों में जल स्तर का गणित

तमिलनाडु सरकार ने एक आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि 3 अगस्त तक कर्नाटक के चार प्रमुख बांधों—कृष्ण राज सागर (केआरएस), काबिनी, हरंगी और हेमावती—में कुल जल भंडारण 77.537 टीएमसी (हजार मिलियन क्यूबिक फीट) था। राज्य का कहना है कि केआरएस और काबिनी के जलग्रहण क्षेत्रों में हाल ही में हुई बारिश के हिसाब से बिलिगुंडलू में तमिलनाडु का अनुपातित हिस्सा 26.954 टीएमसी बनता है।

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प्राधिकरण के फैसले पर आपत्ति

तमिलनाडु ने कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) के उस आदेश को अपर्याप्त बताया है जिसमें केवल 4.536 टीएमसी पानी आवंटित किया गया था। राज्य का कहना है कि कर्नाटक के पास पर्याप्त जल भंडार उपलब्ध होने के बावजूद वह तमिलनाडु के हिस्से का पूरा 26.954 टीएमसी पानी देने में नाकाम रहा है।

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