अंकित शर्मा हत्याकांड: दोषियों की अपील पर हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस से मांगा जवाब, 2 दिसंबर को होगी अगली सुनवाई

साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस विकास महाजन की पीठ ने मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे दो दोषियों—नाज़िम और कासिम—की याचिकाओं को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। अदालत ने उनकी सजा निलंबित करने की मांग वाली अर्जी पर भी अभियोजन से जवाब तलब किया है और मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर तय की है।

पहचान परेड न कराने का दिया तर्क

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी कि निचली अदालत का फैसला कानूनी रूप से बनाए रखने योग्य नहीं है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों ने मामले में कोई टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड (पहचान परेड) आयोजित नहीं की, और जिस गवाह के बयान पर भरोसा किया गया है, उसका समर्थन करने के लिए कोई स्वतंत्र साक्ष्य मौजूद नहीं है।

दूसरी ओर, अभियोजन पक्ष की ओर से उपस्थित एडवोकेट रजत नायर ने पीठ को सूचित किया कि राज्य सरकार भी निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने की तैयारी कर रही है। सरकार इस मामले में छह अन्य आरोपियों को बरी किए जाने के आदेश के खिलाफ अपील दाखिल करेगी।

ट्रायल कोर्ट का फैसला और उम्रकैद

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इससे पहले 31 जुलाई को ट्रायल कोर्ट ने आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन और चार अन्य सह-अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। ताहिर हुसैन को हत्या, जानलेवा हथियारों से दंगा भड़काने और समूहों के बीच दुश्मनी फैलाने सहित भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया था।

नाज़िम, कासिम और दो अन्य आरोपियों को दंगे और हमले के आरोपों में दोषी पाया गया था, हालांकि उन्हें हत्या के सीधे आरोप से मुक्त रखा गया था। सुनवाई के दौरान अभियोजन ने सभी पांचों दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी और कहा था कि अंकित शर्मा पर जिस निर्दयता से हमला किया गया, वह बेहद क्रूरता को दर्शाता है।

नाले से बरामद हुआ था शव

यह मामला मृतक अधिकारी के पिता रविंद्र कुमार की शिकायत पर दयालपुर थाने में दर्ज किया गया था। शिकायत के अनुसार, अंकित शर्मा 25 फरवरी 2020 को दफ्तर से घर लौटने के बाद शाम को बाहर निकले थे। काफी देर तक वापस न आने पर परिजनों ने खोजबीन शुरू की, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने बताया कि अंकित की हत्या कर दी गई है और उनका शव चांद बाग पुलिया के पास स्थित खजूरी खास नाले में फेंक दिया गया है।

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अधिकारियों ने बाद में नाले से शव बरामद किया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि ताहिर हुसैन और उसके सहयोगियों ने हुसैन के कार्यालय परिसर में इकट्ठा होकर हत्या की साजिश रची और वारदात के बाद शव को नाले में फेंक दिया।

उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की पृष्ठभूमि

यह घटना फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़की सांप्रदायिक हिंसा का हिस्सा थी। इस दौरान हुई व्यापक आगजनी, पथराव और तोड़फोड़ में 53 लोगों की जान चली गई थी और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे।

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