दिल्ली के एक जिला उपभोक्ता आयोग ने दूध डिलीवरी करने वाली एक डेयरी कंपनी को आदेश दिया है कि वह अपने पूर्व ग्राहक के मोबाइल ऐप वॉलेट में बचे 170 रुपये 6 फीसदी वार्षिक ब्याज के साथ लौटाए। इसके साथ ही उपभोक्ता को हुई मानसिक परेशानी और कानूनी खर्च के हर्जाने के तौर पर कंपनी पर 2,500 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि ग्राहक द्वारा सेवा बंद किए जाने के बाद किसी भी कंपनी को उसकी अप्रयुक्त राशि अपने पास रोके रखने का कानूनी अधिकार नहीं है और ऐसा करना सीधे तौर पर सेवा में कमी का मामला है।
जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग-VII (दक्षिण-पश्चिम दिल्ली) के अध्यक्ष सुरेश कुमार गुप्ता और सदस्य हर्षाली कौर की पीठ ने यह निर्णय समीर सरकार नामक उपभोक्ता की शिकायत पर 22 सितंबर को सुनाया। पीठ ने कहा कि दूध की आपूर्ति बंद होने के बाद डेयरी कंपनी का यह वैधानिक दायित्व था कि वह वॉलेट की शेष रकम तत्काल वापस करे, लेकिन कंपनी ने बिना किसी वाजिब कारण के ग्राहक का पैसा अपने पास रोके रखा।
खराब गुणवत्ता के कारण बंद की थी रोजाना दूध की सप्लाई
शिकायत के मुताबिक, समीर सरकार अपने घर पर रोजाना सुबह दूध मंगाने के लिए संबंधित डेयरी कंपनी के मोबाइल ऐप का इस्तेमाल कर रहे थे। दूध की गुणवत्ता खराब पाए जाने के बाद उन्होंने सितंबर 2023 में यह सेवा बंद करने का निर्णय लिया।
कंपनी की ओर से उनके पते पर अंतिम डिलीवरी 24 सितंबर 2023 को की गई थी। सेवा बंद होने के बावजूद समीर के ऐप वॉलेट में 170 रुपये का बैलेंस बचा रह गया। उन्होंने 29 सितंबर 2023 को कंपनी से यह राशि वापस करने का औपचारिक अनुरोध किया। जब कंपनी ने पैसे वापस नहीं लौटाए, तो उन्होंने मामले की शिकायत पहले राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन पर की और इसके बाद जिला उपभोक्ता आयोग की शरण ली।
कंपनी ने अपनी ही रिफंड नीति का नहीं किया पालन
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने शिकायतकर्ता द्वारा पेश किए गए मोबाइल ऐप के स्क्रीनशॉट्स का बारीकी से अध्ययन किया। इन साक्ष्यों से पुष्टि हुई कि 24 और 25 सितंबर 2023 को उनके खाते में 170 रुपये का एक्टिव बैलेंस मौजूद था।
इसके अलावा आयोग ने कंपनी द्वारा ग्राहक को भेजे गए एक ईमेल रिकॉर्ड का भी संज्ञान लिया। इस ईमेल में कंपनी ने भरोसा दिलाया था कि यदि कोई ग्राहक उत्पाद की गुणवत्ता से संतुष्ट नहीं होता है, तो उसे रिफंड दिया जाएगा। आयोग ने रेखांकित किया कि इसके बावजूद जब उपभोक्ता ने अपनी शिकायत दर्ज कराई, तो कंपनी ने अपनी ही नीति की अनदेखी करते हुए बकाया राशि लौटाने से इनकार कर दिया।
नोटिस के बाद भी नहीं पहुंची कंपनी, एकतरफा फैसला
आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार, कानूनी नोटिस तामील होने के बावजूद डेयरी कंपनी आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं हुई और न ही उसने अपना कोई पक्ष रखा। इसके चलते आयोग ने 10 जुलाई 2024 को कंपनी के खिलाफ एकतरफा (एक्स-पार्टे) कार्यवाही करने का निर्देश दिया था। आयोग ने शिकायतकर्ता समीर सरकार के शपथ पत्र और उनके द्वारा पेश किए गए दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर इस मामले का अंतिम निस्तारण किया।
45 दिनों के भीतर भुगतान करने का आदेश
आयोग ने शिकायत को स्वीकार करते हुए डेयरी कंपनी को निर्देश दिया कि वह 170 रुपये की मूल राशि पर शिकायत दर्ज होने की तिथि (26 फरवरी 2024) से भुगतान की तारीख तक 6 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज अदा करे।
इसके अतिरिक्त मानसिक संताप, प्रताड़ना और कानूनी खर्च के रूप में तय 2,500 रुपये की क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान आदेश की प्रति मिलने के 45 दिनों के भीतर करना होगा। यदि कंपनी निर्धारित अवधि में इस राशि का भुगतान करने में विफल रहती है, तो 2,500 रुपये पर भी आदेश की तिथि से वास्तविक भुगतान होने तक 6 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज चुकाना पड़ेगा।

