राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर के ऐतिहासिक वॉल्ड सिटी क्षेत्र की बिगड़ती स्थिति पर स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्यवाही शुरू की है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि दिसंबर 2026 से पहले प्रभावी सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो जयपुर का यह ऐतिहासिक इलाका UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा खो सकता है।
जस्टिस प्रमिल कुमार माथुर ने 10 राज्य और स्थानीय प्राधिकरणों को नोटिस जारी किए हैं। साथ ही जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) और शहर के नगर निगमों को वॉल्ड सिटी में हो रहे अनधिकृत और बिना नियंत्रण वाले निर्माणों का सर्वे करने और दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने यह कार्यवाही एक समाचार रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए शुरू की, जिसमें पिंक सिटी की विरासत पर बढ़ते खतरे का मुद्दा उठाया गया था।
कोर्ट ने कहा कि यदि दिसंबर 2026 से पहले पर्याप्त और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो वॉल्ड सिटी के UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज दर्जे पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। कोर्ट के अनुसार, ऐसा दर्जा वापस लिए जाने से स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है, जयपुर की वैश्विक पहचान कमजोर हो सकती है और यह वर्तमान पीढ़ी को सौंपी गई विरासत की रक्षा में विफलता होगी।
अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर चिंता
हाईकोर्ट ने कहा कि 2019 में UNESCO वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा पाने वाले जयपुर के वॉल्ड सिटी क्षेत्र में हो रहे बदलाव गंभीर चिंता का विषय हैं।
कोर्ट ने कोर और बफर जोन में अवैध निर्माण, बिना अनुमति बदलाव और अतिक्रमण की रिपोर्टों का उल्लेख किया।
कोर्ट ने यह भी कहा कि पारंपरिक महल और पुरानी इमारतें धीरे-धीरे गायब हो रही हैं और उनकी जगह ऐसे आधुनिक निर्माण ले रहे हैं जो शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप नहीं हैं।
कोर्ट के अनुसार, कई विकास कार्य कथित रूप से उचित हेरिटेज इम्पैक्ट असेसमेंट के बिना किए जा रहे हैं, जबकि नियमों को लागू करने की व्यवस्था कमजोर या लगभग निष्क्रिय दिखाई देती है।
UNESCO ने पहले भी उठाई थीं चिंताएं
हाईकोर्ट ने कहा कि UNESCO ने पहली बार 2023 में इन मुद्दों पर चिंता जताई थी और 2025 में भी इन्हें दोहराया, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में पर्याप्त सुधार होता नहीं दिखा।
कोर्ट ने कहा कि अब तक उठाए गए प्रशासनिक कदम समस्या की गंभीरता और व्यापकता को देखते हुए पर्याप्त साबित नहीं हुए हैं। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि सख्त, समयबद्ध और लागू किए जा सकने वाले निर्देश नहीं दिए गए तो नुकसान जल्द ही ऐसा हो सकता है जिसे ठीक करना मुश्किल होगा।
निर्माण अनुमतियों पर जवाब मांगा
राज्य और स्थानीय प्राधिकरणों से यह बताने को कहा गया है कि विरासत क्षेत्रों के आसपास निर्माण की अनुमति देने से पहले हेरिटेज इम्पैक्ट असेसमेंट या विशेषज्ञों की राय ली गई थी या नहीं।
कोर्ट ने पिछले पांच वर्षों में हुए अनधिकृत निर्माणों का विवरण भी मांगा है। साथ ही यह बताने को कहा है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ ध्वस्तीकरण, सीलिंग, अभियोजन और जुर्माने जैसी क्या कार्रवाई की गई।
अधिकारियों से यह भी बताने को कहा गया है कि हेरिटेज स्थलों के आसपास बफर जोन, ऊंचाई संबंधी प्रतिबंध और वास्तु नियंत्रण से जुड़े नियम बनाए गए हैं या नहीं, और यदि बनाए गए हैं तो उनका कितना पालन हो रहा है।
हाईकोर्ट ने यह भी पूछा है कि मौजूदा प्लानिंग और संरक्षण नियमों को लागू करने में यदि कोई विफलता हुई है तो उसके क्या कारण हैं और इससे विरासत क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान पर कितना असर पड़ा है।
चरणबद्ध कार्ययोजना पेश करने का निर्देश
कोर्ट ने अधिकारियों को एक चरणबद्ध कार्ययोजना पेश करने का निर्देश दिया है, जिसमें तत्काल और दीर्घकालिक दोनों उपाय शामिल हों।
इस योजना में विरासत इमारतों के और अधिक क्षरण को रोकने के साथ-साथ जयपुर के वॉल्ड सिटी क्षेत्र के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्वरूप को संरक्षित और बहाल करने के उपाय भी बताने होंगे।

