करूर भगदड़ मामला: गवाहों को प्रभावित करने के आरोपों पर मंगलवार को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट तमिलनाडु के करूर में पिछले साल हुई दर्दनाक भगदड़ के मामले में गवाहों को प्रभावित करने के आरोपों पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। कोर्ट इस मामले में दायर एक तात्कालिक याचिका पर मंगलवार यानी 7 जुलाई को सुनवाई करेगा। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार के कुछ मंत्री इस मामले के गवाहों पर दबाव बनाने और उन्हें प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस शील नागू की पीठ इस संवेदनशील मामले की समीक्षा करेगी। द्रमुक (DMK) के संगठन सचिव आर.एस. भारती की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हुजेफा अहमदी ने कोर्ट से इस मामले पर जल्द सुनवाई का अनुरोध किया था। अहमदी ने दलील दी कि कोर्ट के आदेश पर ही इस हादसे की सीबीआई (CBI) जांच चल रही है, लेकिन वर्तमान सरकार में मंत्री पद पर बैठे कुछ आरोपी गवाहों को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री और मंत्रियों पर बयानबाजी रोकने की मांग

याचिका में आर.एस. भारती को इस मामले में एक पक्ष (प्रतिवादी) के रूप में शामिल करने की मांग की गई है। इसके साथ ही, याचिका में सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई गई है कि वह तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय, मंत्री आधव अर्जुना और अन्य आरोपियों को इस मामले और सीबीआई जांच को लेकर कोई भी सार्वजनिक बयान देने या पीड़ितों के परिवारों से सीधे संपर्क करने से रोके।

याचिकाकर्ता ने विशेष रूप से मंत्री आधव अर्जुना पर 2 जुलाई 2026 को दिए गए एक सार्वजनिक बयान का हवाला देते हुए आरोप लगाया है कि यह बयान गवाहों को डराने और जांच में बाधा डालने के उद्देश्य से दिया गया था। याचिका में कोर्ट से मांग की गई है कि सीबीआई को इस मामले में शिकायत दर्ज कर अर्जुना के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया जाए।

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मदद और मुआवजे पर अदालती निगरानी की अपील

जांच की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए याचिका में मांग की गई है कि पीड़ितों के परिवारों को दी जाने वाली सरकारी नौकरी, वित्तीय सहायता या अन्य राहत योजनाओं पर अदालती सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं। याचिका के अनुसार, राज्य सरकार को किसी भी प्रकार की राहत योजना को लागू करने से पहले उसका पूरा खाका सीबीआई के सामने रखना चाहिए, ताकि गवाहों या सबूतों से किसी भी तरह की छेड़छाड़ की गुंजाइश न बचे।

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याचिका में मुख्यमंत्री जोसेफ विजय, आधव अर्जुना के अलावा बुस्सी आनंद और सीटी निर्मल कुमार जैसे सहयोगियों को भी लंबित जांच के गुण-दोष पर टिप्पणी करने से रोकने की अपील की गई है ताकि वे राजनीतिक विरोधियों को डराने या जांच को प्रभावित करने वाले बयान न दे सकें।

करूर हादसे की पृष्ठभूमि

यह पूरा मामला 27 सितंबर 2025 को करूर में ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) द्वारा आयोजित एक जनसभा के दौरान हुई भगदड़ से जुड़ा है। इस भीषण हादसे में 41 लोगों की जान चली गई थी और 142 लोग घायल हुए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 13 अक्टूबर 2025 को इस हादसे की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। इस केंद्रीय जांच की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस अजय रस्तोगी की अध्यक्षता वाली एक समिति कर रही है।

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