उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने खाते में पर्याप्त राशि होने के बावजूद दुर्घटना बीमा पॉलिसी का प्रीमियम नहीं काटने पर भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को सेवा में कमी का जिम्मेदार ठहराया है। आयोग ने सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले युवक की मां को ₹2 लाख की बीमा राशि देने का आदेश दिया है।
आयोग के अध्यक्ष हसनैन कुरैशी और सदस्य पूर्णिमा सिंह राजपूत ने 9 अक्टूबर के आदेश में बैंक की लापरवाही को देखते हुए बीमा राशि के अलावा मानसिक परेशानी के लिए ₹5,000 और मुकदमे के खर्च के लिए ₹5,000 देने का भी निर्देश दिया। इस तरह बैंक को कुल ₹2.10 लाख का भुगतान करना होगा।
आयोग ने पाया कि बैंक को ग्राहक के खाते से ₹100 का वार्षिक प्रीमियम काटकर बीमा कंपनी को भेजना था, लेकिन पर्याप्त बैलेंस होने के बावजूद उसने ऐसा नहीं किया।
2014 में ली थी दुर्घटना बीमा पॉलिसी
शिकायतकर्ता के अनुसार, उनके बेटे ने वर्ष 2014 में SBI में खाता खुलवाया था। उसने ₹100 के वार्षिक प्रीमियम पर ₹2 लाख का दुर्घटना बीमा लिया था। पहले वर्ष का प्रीमियम बैंक ने उसके खाते से काट लिया था।
हालांकि, 18 अक्टूबर 2015 से 17 अक्टूबर 2016 तक की अगली बीमा अवधि के लिए बैंक ने प्रीमियम नहीं काटा।
इसी बीच 11 जनवरी 2016 को युवक की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई। बीमा पॉलिसी में नॉमिनी होने के कारण उसकी मां ने बीमा राशि के भुगतान का दावा किया।
बीमा कंपनी ने दावा स्वीकार करने से इनकार करते हुए कहा कि उसे नवीनीकरण का प्रीमियम नहीं मिला था। इसलिए दुर्घटना की तारीख को कवर करने वाली कोई बीमा पॉलिसी जारी नहीं की गई थी।
इसके बाद महिला ने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कर ₹2 लाख की बीमा राशि, मानसिक परेशानी के लिए ₹50,000 और मुकदमे के खर्च के रूप में ₹10,000 की मांग की।
वहीं, नोटिस मिलने के बावजूद SBI ने आयोग के समक्ष अपना लिखित जवाब दाखिल नहीं किया।
खाते में मौजूद थे पर्याप्त पैसे
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने मृतक के बैंक खाते का विवरण देखा। रिकॉर्ड से पता चला कि युवक ने 15 अक्टूबर 2015 को अपने खाते में ₹500 जमा किए थे। इसके बाद 22 नवंबर 2015 तक खाते में ₹100 से अधिक की राशि बनी रही।
आयोग ने पाया कि बैंक के पास प्रीमियम काटने और बीमा कंपनी को भेजने के लिए पर्याप्त समय था।
आयोग के अनुसार, बैंक की जिम्मेदारी थी कि वह 18 अक्टूबर 2015 को या उसके अगले एक महीने के भीतर खाते से ₹100 काटकर बीमा कंपनी को जमा करता।
आयोग ने स्पष्ट किया कि पर्याप्त राशि उपलब्ध होने के बावजूद प्रीमियम जमा नहीं करना बैंक की लापरवाही और सेवा में कमी है।
SBI को ₹2.10 लाख भुगतान का आदेश
आयोग ने माना कि बैंक की गलती के कारण बीमा पॉलिसी का नवीनीकरण नहीं हो सका। इसलिए शिकायतकर्ता बीमा राशि प्राप्त करने की हकदार है।
आयोग ने SBI को ₹2 लाख की बीमा राशि के साथ मानसिक परेशानी के लिए ₹5,000 और मुकदमे के खर्च के लिए ₹5,000 देने का आदेश दिया।
इस फैसले में आयोग ने स्पष्ट किया कि ग्राहक के खाते में पर्याप्त रकम होने के बावजूद बीमा प्रीमियम काटने और बीमा कंपनी को भेजने में विफल रहने पर बैंक को सेवा में कमी के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
