ऑनलाइन पेमेंट के बावजूद सामान नहीं देने पर ई-कॉमर्स वेबसाइट पर ₹22,734 का जुर्माना, उपभोक्ता आयोग ने दिया मुआवजे का आदेश

कन्नूर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने ऑनलाइन भुगतान के बावजूद गद्दे की डिलीवरी नहीं करने और महिला से दोबारा पैसे लेने के मामले में एक ई-कॉमर्स वेबसाइट को ₹22,734 का भुगतान करने का आदेश दिया है। आयोग ने वेबसाइट की कार्रवाई को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना है।

आयोग ने वेबसाइट को महिला के ₹7,734 वापस करने के साथ मानसिक परेशानी के लिए ₹10,000 मुआवजा और मुकदमे के खर्च के रूप में ₹5,000 देने का निर्देश दिया।

आयोग के अध्यक्ष रवि सुशा और सदस्य मोलीकुट्टी मैथ्यू तथा सजीश केपी ने 9 अक्टूबर को यह आदेश पारित किया।

पहली बार पैसे कटे, लेकिन नहीं मिला सामान

मामले के अनुसार, महिला ने 1 अक्टूबर 2024 को एक ई-कॉमर्स वेबसाइट से गद्दा ऑर्डर किया था। इसकी डिलीवरी एक सप्ताह के भीतर होनी थी। महिला ने डिजिटल पेमेंट ऐप के माध्यम से ऑनलाइन भुगतान किया।

हालांकि, उसके बैंक खाते से पैसे कटने के बावजूद वेबसाइट ने भुगतान प्राप्त होने से इनकार कर दिया और गद्दे की डिलीवरी नहीं की।

इसके बाद महिला को दोबारा भुगतान करना पड़ा, जिसके बाद उसे गद्दा मिला। लेकिन पहली बार काटी गई राशि वापस मांगने पर वेबसाइट ने कोई जवाब नहीं दिया।

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इससे परेशान होकर महिला ने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई।

वेबसाइट ने भुगतान मिलने से किया इनकार

ई-कॉमर्स वेबसाइट की ओर से अधिवक्ता संदीप सुकुमारन और विवेक पीके ने दलील दी कि वेबसाइट केवल एक मध्यस्थ के रूप में काम करती है। उनके अनुसार, महिला गलत डेबिट ट्रांजैक्शन का शिकार हुई थी।

वेबसाइट का कहना था कि विवादित राशि उसके खाते में कभी नहीं पहुंची और उसके रिकॉर्ड में भी ऐसा कोई ट्रांजैक्शन दर्ज नहीं था।

दूसरी ओर, केरल ग्रामीण बैंक की ओर से अधिवक्ता टीपी रामचंद्रन ने बताया कि महिला द्वारा भेजी गई राशि वेबसाइट के खाते में जमा हो गई थी और वह अपने आप वापस नहीं हुई।

उन्होंने कहा कि UPI ट्रांजैक्शन के लिए निर्धारित समयसीमा एक दिन है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के नियमों के अनुसार, वेबसाइट के लाभार्थी बैंक को एक दिन के भीतर राशि वापस करनी चाहिए थी। ऐसा नहीं होने पर महिला मुआवजे की हकदार थी।

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डिजिटल पेमेंट ऐप की ओर से अधिवक्ता एके सजीतकुमार ने दलील दी कि यह ट्रांजैक्शन बाहरी व्यापारी को किया गया भुगतान था। ऐप केवल UPI प्रणाली के तहत थर्ड-पार्टी एप्लिकेशन प्रोवाइडर की भूमिका निभाता है।

उन्होंने कहा कि राशि वेबसाइट के बैंक खाते में जमा हो चुकी थी, इसलिए पैसे वापस करने या सामान की डिलीवरी करने की जिम्मेदारी उसी की थी।

बैंक स्टेटमेंट से भुगतान की पुष्टि

आयोग ने महिला के बैंक स्टेटमेंट की जांच के बाद पाया कि विवादित राशि ई-कॉमर्स वेबसाइट के खाते में भेजी गई थी।

आयोग ने यह भी पाया कि महिला द्वारा शिकायत करने के बाद वेबसाइट से संबंधित ऑर्डर की जानकारी हटा दी गई थी।

इसके अलावा, डिजिटल पेमेंट ऐप से ट्रांजैक्शन का पता लगाने संबंधी जानकारी मिलने के बावजूद वेबसाइट ने अपने बैंक से भुगतान की पुष्टि करने का प्रयास नहीं किया।

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आयोग ने कहा कि महिला के खाते से उस सामान के लिए पैसे कटे थे, जिसकी डिलीवरी नहीं की गई। सामान नहीं मिलने के बावजूद रकम वापस नहीं की गई।

आयोग के अनुसार, वेबसाइट के रवैये से महिला को आर्थिक नुकसान और मानसिक परेशानी हुई। शिकायत का समाधान करना वेबसाइट की जिम्मेदारी थी।

₹22,734 देने का आदेश

आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि इस मामले में सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए केवल ई-कॉमर्स वेबसाइट जिम्मेदार है।

इसके आधार पर आयोग ने वेबसाइट को महिला के ₹7,734 वापस करने, मानसिक परेशानी के लिए ₹10,000 मुआवजा देने और मुकदमे के खर्च के रूप में ₹5,000 का भुगतान करने का आदेश दिया।

इस तरह महिला को कुल ₹22,734 देने का निर्देश दिया गया।

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