राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, एटीएम चोरी के आरोपियों को बेल के लिए लगाने होंगे 150 पेड़

राजस्थान हाईकोर्ट ने आपराधिक न्याय प्रणाली में सुधारात्मक दृष्टिकोण (Reformative Approach) को बढ़ावा देते हुए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। हाईकोर्ट ने एटीएम चोरी के मामले में गिरफ्तार दो आरोपियों को इस शर्त पर जमानत दी है कि वे एक महीने तक रोजाना पांच पेड़ लगाएंगे और उनकी देखभाल सुनिश्चित करेंगे।

जस्टिस चंद्र प्रकाश श्रीमाली ने यह आदेश पारित करते हुए स्पष्ट किया कि नए आपराधिक कानूनों के तहत दंड के बजाय सुधार पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है। कोर्ट ने कहा कि अपराधियों को समाज की मुख्यधारा में वापस लाने और उनके पुनर्वास के लिए सामुदायिक सेवा (Community Service) एक सशक्त माध्यम साबित हो सकती है।

अदालत वारिस (उर्फ लहकी) और उस्मान (उर्फ अंधा) द्वारा दायर दो संबद्ध जमानत याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। ये दोनों आरोपी 9 जनवरी, 2026 से डीडवाना-कुचामन जिला जेल में बंद थे।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, खुनखुना थाने में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर इन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। इन पर आरोप था कि इन्होंने गैस कटर का उपयोग करके भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के एक एटीएम को काटा और चोरी की वारदात को अंजाम दिया। पुलिस का दावा था कि वारदात में इस्तेमाल वाहन चोरी का था और उसकी नंबर प्लेट के साथ छेड़छाड़ की गई थी। इन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।

सुनवाई के दौरान जस्टिस श्रीमाली ने पाया कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है। कोर्ट ने गौर किया कि आरोपियों से अब कोई रिकवरी शेष नहीं है और यह मामला मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

READ ALSO  लुधियाना की अदालत ने 7 साल की बच्ची से रेप और हत्या के मामले में दो को मौत की सजा सुनाई है

हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे आरोपियों को लंबे समय तक जेल में रखना “प्रतिकूल” (Counterproductive) हो सकता है। कोर्ट ने राज्य सरकार को सुझाव दिया कि सामुदायिक सेवा के आदेशों की निगरानी के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार किया जाना चाहिए ताकि सुधारात्मक न्याय के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।

इसके अलावा, कोर्ट ने राजस्थान के मुख्य सचिव को एक कार्ययोजना विकसित करने का निर्देश दिया है, जो आपराधिक व्यवहार के कारणों की पहचान करे और अपराधियों के पुनर्वास में मदद करे।

READ ALSO  भौतिक साक्ष्यों की अनदेखी नहीं की जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अलकायदा संदिग्ध को जमानत देने से किया इनकार

जमानत मंजूर करते हुए हाईकोर्ट ने अनिवार्य सामुदायिक सेवा की शर्त रखी है। वारिस और उस्मान को 30 दिनों तक प्रतिदिन कम से कम पांच पेड़ लगाने होंगे।

जमानत की मुख्य शर्तें इस प्रकार हैं:

  • वृक्षारोपण: आदेश के एक सप्ताह के भीतर यह कार्य शुरू करना होगा।
  • सहयोग: वन विभाग को निर्देश दिया गया है कि वे निःशुल्क पौधे उपलब्ध कराएं।
  • निगरानी: अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए रिपोर्ट, फोटो और वीडियो अधिकारियों को सौंपने होंगे।
  • बॉन्ड: प्रत्येक आरोपी को 1 लाख रुपये का व्यक्तिगत मुचलका और 50-50 हजार रुपये की दो जमानतें देनी होंगी।
  • फॉलो-अप: तीन महीने बाद यह मामला दोबारा कोर्ट में सूचीबद्ध किया जाएगा ताकि वृक्षारोपण की प्रगति की समीक्षा की जा सके।
READ ALSO  मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने खेल संघों के मामलों से खुद को अलग किया

हाईकोर्ट ने इस आदेश की प्रति कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखने और इसे सभी जिला न्यायाधीशों व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के अध्यक्षों को प्रसारित करने का निर्देश दिया है, ताकि सामुदायिक सेवा के कार्यान्वयन की प्रभावी निगरानी हो सके।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles