कोर्ट ने कहा, नए वकील न याचिका लिख पाते न तो ढंग से बहस कर पाते ,कानूनी शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाए

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सख्त लहजा इख्तियार करते हुए बार कॉउन्सिल ऑफ इंडिया को खरी खोटी सुनाई है। कोर्ट ने कहा कि नव नियुक्त अधिवक्ता न तो ढंग से याचिका तैयार कर पाते और न तो कोर्ट में मुददे पर बहस करने में सक्षम है। कई बार तो उनकी कोर्ट के सामने बोलती बंद हो जाती है। कोर्ट ने बार कॉउन्सिल ऑफ इंडिया को चेतावनी देते हुए कानूनी शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए कहा है।

आपको बता दे ये सम्पूर्ण प्रकरण चड़ीगढ़ सोसाइटी द्वारा कोर्ट में दायर याचिका से सम्बंधित है। हाईकोर्ट में सोसाइटी ने याचिका दायर करते हुए कहा था की उसने वर्ष 2017- 2018 के मध्य चंडीगढ़ में लॉ कॉलेज खोलने के लिए मोहाली की झँझेडी में 5.65 एकड़ भूमि खरीदी थी। पंजाब यूनिवर्सिटी और पंजाब सरकार से एनओसी भी मिल गई। 27 करोड़ से तैयार इस कॉलेज में दो ऑडिटोरियम और सभी आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है।

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इसके बाद जब 2020-2021 के सत्र की शुरुआत करने के लिए बार कॉउन्सिल ऑफ इंडिया से इजाजत मांगी तो उन्होंने तीन साल का मोरेटोरियंम लागू होने की बात कहा। इस आदेश को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।

हाईकोर्ट ने बार कॉउन्सिल ऑफ इंडिया द्वारा मोरेटोरियंम वाले आदेश को खारिज करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि बीसीआई के पास लॉ कॉलेज खोलने के लिए मोरेटोरियंम लगाने का कोई अधिकार नही है।

हाईकोर्ट ने साफ कर दिया कि बार कॉउन्सिल ऑफ इंडिया नए लॉ कॉलेज खोलने पर पाबंदी नही लगा सकती। बीसीआई का कार्य लॉ कॉलेजों में और यूनिवर्सिटी में उच्च गुणवत्ता की शिक्षा और सुविधाएं सुनिश्चित करना है।

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