पुणे पोर्श हादसा: नया कानूनी मोड़, खून के नमूने बदलने की आरोपी मां ने कोर्ट से मांगी पीड़ितों की फॉरेंसिक और विसरा रिपोर्ट

पुणे के बहुचर्चित पोर्श कार हादसे के ठीक दो साल बाद इस कानूनी लड़ाई में एक नया मोड़ आ गया है। मामले के नाबालिग आरोपी की मां ने, जो खुद सबूत मिटाने के गंभीर आरोपों का सामना कर रही हैं, विशेष अदालत का रुख किया है। उन्होंने दुर्घटना में अपनी जान गंवाने वाले दोनों सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की फॉरेंसिक और विसरा रिपोर्ट सौंपने की मांग की है।

आरोपी मां पर आरोप है कि उन्होंने अपने नाबालिग बेटे के नशे में होने की बात छुपाने के लिए अस्पताल में खुद के खून के नमूने (ब्लड सैंपल) उसके नमूनों से बदल दिए थे। महिला ने यह याचिका ऐसे समय पर दायर की है जब अदालत इस मामले में आरोपियों के खिलाफ आरोप तय (framing of charges) करने की तैयारी कर रही है।

आरोप तय होने से पहले बचाव पक्ष की कानूनी चुनौती

जमानत पर बाहर चल रही आरोपी महिला ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 207 के तहत विशेष अदालत में यह आवेदन दायर किया है। याचिका में दलील दी गई है कि अभियोजन पक्ष (prosecution) अब तक आरोपी पक्ष को हादसे के शिकार हुए अश्विनी कोस्टा और अनीश अवधिया की खून और विसरा जांच की महत्वपूर्ण रिपोर्ट उपलब्ध कराने में विफल रहा है।

बचाव पक्ष के वकीलों का कहना है कि इस स्तर पर इन महत्वपूर्ण दस्तावेजों को रोकना कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन है।

याचिका में कहा गया है, “यह मामला फिलहाल आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने के आदेश के चरण में है। जब तक सीआरपीसी की धारा 207 के तहत अनिवार्य कानूनी प्रावधानों का पालन नहीं किया जाता, तब तक आरोपियों के खिलाफ चलने वाला पूरा मुकदमा दूषित और अमान्य हो जाएगा।”

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आरोपी महिला की ओर से अदालत से प्रार्थना की गई है कि वह अभियोजन पक्ष को दोनों पीड़ितों की ब्लड और विसरा जांच की अंतिम फॉरेंसिक रिपोर्ट तुरंत सौंपने का निर्देश दे।

क्या है ब्लड-सैंपल बदलने की पूरी साजिश?

याचिकाकर्ता उन 10 लोगों में शामिल हैं जिन्हें हादसे के बाद मामले को दबाने और सबूतों से छेड़छाड़ करने की बड़ी साजिश के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

पुलिस जांच के अनुसार, दुर्घटना के तुरंत बाद नाबालिग आरोपी को चिकित्सा जांच के लिए ससून जनरल अस्पताल ले जाया गया था। आरोप है कि यह छुपाने के लिए कि 17 वर्षीय आरोपी शराब के नशे में गाड़ी चला रहा था, अस्पताल के दो डॉक्टरों की मदद से उसके खून के नमूनों को उसकी मां के ब्लड सैंपल से बदल दिया गया।

जांच में यह भी सामने आया था कि पोर्श कार में सवार नाबालिग के दो अन्य दोस्तों के खून के नमूने भी इसी तरह बदले गए थे ताकि उन्हें भी कानूनी कार्रवाई से बचाया जा सके।

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मामले की पृष्ठभूमि: जिसने पूरे देश को झकझोर दिया

यह दिल दहला देने वाला हादसा 19 मई 2024 को पुणे के कल्याणीनगर इलाके में हुआ था।

अनीश अवधिया और अश्विनी कोस्टा मोटरसाइकिल से जा रहे थे, तभी एक तेज रफ्तार लग्जरी पोर्श कार ने उन्हें पीछे से टक्कर मार दी। इस भयानक टक्कर में दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। आरोप है कि हादसे के वक्त कार को 17 साल का नाबालिग शराब के नशे में बेहद लापरवाही से चला रहा था।

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इस घटना के बाद देश भर में नाबालिगों द्वारा ड्राइविंग के कड़े कानूनों और प्रशासनिक भ्रष्टाचार को लेकर भारी आक्रोश देखा गया था। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले का भविष्य विशेष अदालत द्वारा तय किए जाने वाले आरोपों और बचाव पक्ष द्वारा खड़ी की गई इस नई कानूनी अड़चन पर निर्भर करेगा।

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