भोपाल संदिग्ध मौत मामला: ट्विशा शर्मा की मौत की निष्पक्ष जांच के लिए वकील ने CJI और एमपी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को लिखा पत्र

भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में नोएडा की रहने वाली ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है। इस संवेदनशील मामले में निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग को लेकर भोपाल के एक स्थानीय अधिवक्ता ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र याचिका भेजी है।

यह कदम ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा द्वारा अधिवक्ता विवेक तिवारी को ईमेल के जरिए इंसाफ की गुहार लगाने के बाद उठाया गया है। गौरतलब है कि बीती 12 मई को ट्विशा का शव उनके भोपाल स्थित ससुराल में फंदे से लटकता हुआ मिला था, जिसके बाद से ही मायके पक्ष द्वारा गंभीर दहेज उत्पीड़न के आरोप लगाए जा रहे हैं।

“अत्यंत गंभीर और संवेदनशील” हैं मामले के तथ्य

अधिवक्ता विवेक तिवारी ने देश और राज्य के सर्वोच्च न्यायिक पदाधिकारियों को लिखे अपने पत्र में इस बात पर जोर दिया है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इस पर उच्च स्तरीय निगरानी रखना आवश्यक है।

“मृतका के पिता द्वारा साझा किए गए तथ्य और परिस्थितियां अत्यंत गंभीर, संवेदनशील और कानूनी रूप से बेहद महत्वपूर्ण प्रतीत होते हैं।” — अधिवक्ता विवेक तिवारी

पीड़ित परिवार की सबसे बड़ी चिंता मृतका की सास गिरिबाला सिंह के रसूख को लेकर है, जो इस मामले की मुख्य आरोपियों में से एक हैं। गिरिबाला सिंह एक सेवानिवृत्त अतिरिक्त जिला न्यायाधीश (ADJ) हैं और वर्तमान में भोपाल जिला उपभोक्ता फोरम की अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं।

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पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि रसूखदार आरोपी सास को मिली अग्रिम जमानत के बाद से ट्विशा के परिवार में स्थानीय पुलिस जांच की निष्पक्षता को लेकर गहरा संदेह और चिंता पैदा हो गई है।

सबूतों और गवाहों से छेड़छाड़ की आशंका

याचिका में मृतका के पिता नवनिधि शर्मा की उन चिंताओं को प्रमुखता से उठाया गया है, जिनमें उन्होंने महत्वपूर्ण साक्ष्यों के नष्ट होने का डर जताया है। पत्र के अनुसार, पिता ने “गवाहों को प्रभावित करने, सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने और सबसे महत्वपूर्ण फॉरेंसिक साक्ष्यों को मिटाए जाने की प्रबल आशंका व्यक्त की है।”

इन आशंकाओं के मद्देनजर, अधिवक्ता ने न्यायिक अधिकारियों से हस्तक्षेप की अपील की है ताकि एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित की जा सके। याचिका में विशेष रूप से मांग की गई है कि मामले से जुड़े सभी फॉरेंसिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को तुरंत सुरक्षित करने के निर्देश दिए जाएं ताकि कोई भी उनके साथ छेड़छाड़ न कर सके।

फरार पति पर 10,000 रुपये का इनाम घोषित

एक तरफ जहां कोर्ट ने मृतका की सास को अग्रिम जमानत दे दी है, वहीं दूसरी तरफ भोपाल की एक स्थानीय अदालत ने मृतका के पति समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। समर्थ सिंह फिलहाल पुलिस की पकड़ से बाहर और फरार चल रहा है।

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फरार पति की जल्द से जल्द गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए पुलिस ने समर्थ सिंह की सूचना देने वाले के लिए 10,000 रुपये के नकद इनाम की घोषणा की है।

दोनों पक्षों के दावों में बड़ा टकराव

इस पूरे मामले में दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं:

  • पीड़ित परिवार का आरोप: ट्विशा के मायके वालों का साफ कहना है कि यह आत्महत्या का मामला नहीं है, बल्कि लगातार की जा रही दहेज की मांग पूरी न होने पर ट्विशा की हत्या की गई है।
  • आरोपी पक्ष का दावा: मृतका की सास गिरिबाला सिंह ने दहेज उत्पीड़न और हत्या के सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका दावा है कि ट्विशा मानसिक रूप से अस्वस्थ थीं और उनका इलाज चल रहा था, साथ ही वह कथित तौर पर नशे की लत से भी जूझ रही थीं।
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सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशों से महत्वपूर्ण डिजिटल व फॉरेंसिक साक्ष्यों को संरक्षित करने की मांग के बाद, अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए कोई विशेष न्यायिक निर्देश जारी किए जाते हैं।

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