नोएडा हिंसा: सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को दिया दो आरोपियों को पेश करने का आदेश, हिरासत में टॉर्चर के आरोपों पर सुनवाई

नोएडा में पिछले महीने हुए श्रमिकों के हिंसक विरोध प्रदर्शन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को कड़ा निर्देश जारी किया है। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार से कहा है कि वह गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों—आदित्य आनंद और रूपेश रॉय—को 18 मई को दोपहर 2 बजे व्यक्तिगत रूप से अदालत के समक्ष पेश करे। यह निर्देश हिरासत में प्रताड़ना (custodial torture) के गंभीर आरोपों के बीच आया है।

न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। यह याचिका आदित्य आनंद के भाई केशव आनंद द्वारा दायर की गई है, जिसमें दावा किया गया है कि गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आदित्य के साथ मारपीट और अमानवीय व्यवहार किया है।

क्या है हिरासत में हिंसा का पूरा मामला?

अदालत में आदित्य आनंद का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्विस ने कहा कि आदित्य एक इंजीनियर हैं और बच्चों के लिए लाइब्रेरी भी चलाते हैं। गोंजाल्विस ने दलील दी कि आदित्य केवल श्रमिकों के हक की बात कर रहे थे और उनके भाषणों की रिकॉर्डिंग इस बात का प्रमाण है कि उन्होंने हिंसा नहीं भड़काई। याचिकाकर्ता ने मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है।

दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश सरकार के वकील ने टॉर्चर के इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। सरकार का कहना है कि गिरफ्तारी और उसके बाद की पूरी प्रक्रिया कानून के दायरे में रहकर पूरी की गई है।

13 अप्रैल की हिंसा और पुलिस की कार्रवाई

यह पूरा मामला 13 अप्रैल को नोएडा (गौतम बुद्ध नगर) में हुए व्यापक औद्योगिक असंतोष से जुड़ा है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उस दिन लगभग 80 अलग-अलग स्थानों पर 40,000 से 45,000 श्रमिक जमा हुए थे। इस दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा, आगजनी और सार्वजनिक व्यवस्था में बाधा डालने की घटनाएं हुई थीं। पुलिस ने आदित्य आनंद को इस पूरी साजिश का ‘मास्टरमाइंड’ बताया है।

NSA और ₹1 करोड़ की विदेशी फंडिंग का खुलासा

इस मामले में एक नया मोड़ तब आया जब पुलिस ने ‘विदेशी फंडिंग’ के तार इस प्रदर्शन से जुड़ने का दावा किया। पुलिस ने पत्रकार सत्यम वर्मा और छात्र कार्यकर्ता आकृति चौधरी पर कड़ा राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA), 1980 लागू कर दिया है।

गौतम बुद्ध नगर पुलिस के अनुसार, सत्यम वर्मा के निजी बैंक खाते में डॉलर, पाउंड और यूरो के रूप में 1 करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी राशि प्राप्त हुई थी। पुलिस का आरोप है कि सत्यम और आकृति ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़काने में “महत्वपूर्ण भूमिका” निभाई थी। सत्यम वर्मा को 19 अप्रैल को लखनऊ से गिरफ्तार किया गया था। वह वामपंथी संगठन ‘बिगुल मजदूर दस्ता’ का सक्रिय सदस्य बताया जा रहा है। फिलहाल जांच एजेंसियां उन सभी संगठनों की जांच कर रही हैं जिनसे ये आरोपी जुड़े हुए थे।

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