‘तिरछी टोपीवाले’ गाने पर कानूनी जंग: दिल्ली हाई कोर्ट ने ‘धुरंधर’ की OTT रिलीज पर रोक लगाने से किया इनकार

दिल्ली हाई कोर्ट ने 1989 की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘त्रिदेव’ के प्रतिष्ठित गाने ‘तिरछी टोपीवाले’ से जुड़े कॉपीराइट विवाद में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ की OTT रिलीज पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। इस फिल्म में मूल गाने के रीमिक्स वर्जन “रंग दे लाल (ओये ओये)” का इस्तेमाल किया गया है।

न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला ने त्रिमूर्ति फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड की उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें गाने के कॉपीराइट, इसके बोल और संगीत संरचना के उल्लंघन का दावा किया गया था।

14 मई को दिए अपने आदेश में कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण तार्किक पहलू की ओर इशारा किया। फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ पहले ही 19 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है।

जस्टिस गेडेला ने टिप्पणी की कि यदि किसी फिल्म का प्रदर्शन सिनेमाघरों में जायज है, तो उसे OTT प्लेटफॉर्म पर अचानक गैर-कानूनी नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा, “यह सोचना कि वही गाना सिनेमाघरों में तो मान्य होगा लेकिन OTT पर कॉपीराइट का उल्लंघन बन जाएगा, पूरी तरह से तर्कहीन है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।”

इस कानूनी लड़ाई की जड़ें 30 जून, 1988 को त्रिमूर्ति फिल्म्स और सुपर कैसेट्स इंडस्ट्रीज के बीच हुए एक समझौते में छिपी हैं। त्रिमूर्ति फिल्म्स की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता स्वाति सुकुमार ने दलील दी कि यह समझौता केवल रिकॉर्ड, कैसेट और ग्रामोफोन बिक्री तक ही सीमित था। उन्होंने दावा किया कि फिल्म में गाने के इस्तेमाल का अधिकार अभी भी त्रिमूर्ति के पास है।

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इसके विपरीत, सुपर कैसेट्स के वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल ने तर्क दिया कि यह समझौता संगीत और बोल के अधिकारों का पूर्ण हस्तांतरण था। अदालत ने गौर किया कि 1988 के समझौते में “अभी या भविष्य में ज्ञात” (now or hereafter known) तकनीकों के इस्तेमाल का उल्लेख था। जस्टिस गेडेला ने माना कि यह भाषा प्रथम दृष्टया डिजिटल स्ट्रीमिंग जैसे भविष्य के तकनीकी बदलावों को अपने दायरे में लेती है।

कोर्ट ने याचिकाकर्ता, त्रिमूर्ति फिल्म्स द्वारा तथ्यों को छिपाने पर भी सख्त रुख अपनाया। अदालत ने पाया कि कंपनी ने 2016 के एक कानूनी नोटिस और 2016 से 2020 के बीच चल रहे कई अन्य मुकदमों की जानकारी छिपाई थी।

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त्रिमूर्ति फिल्म्स ने यह दावा किया था कि उनका प्रमोटर 1997 से विदेश में है, इसलिए वे कॉपीराइट उल्लंघन की निगरानी नहीं कर सके। हालांकि, अदालत ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि रिकॉर्ड से पता चलता है कि इसी अवधि के दौरान कंपनी अन्य कानूनी लड़ाइयों में सक्रिय थी।

हालांकि कोर्ट ने फिल्म की रिलीज पर रोक नहीं लगाई, लेकिन विवाद की गंभीरता को देखते हुए सुपर कैसेट्स इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड को ₹50 लाख रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा करने का निर्देश दिया है, ताकि मामले के अंतिम फैसले तक दोनों पक्षों के हितों का संतुलन बना रहे।

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