शशि थरूर की ‘शानदार अंग्रेजी’ और बोलने के अंदाज पर अब सिर्फ उनका हक, दिल्ली हाई कोर्ट ने डीपफेक पर लगाई लगाम

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक के बढ़ते खतरों के बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने कांग्रेस सांसद शशि थरूर के ‘पर्सनैलिटी राइट्स’ (व्यक्तित्व अधिकारों) को सुरक्षित करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को उनके डीपफेक वीडियो हटाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि थरूर की आवाज, उनके बोलने का खास अंदाज और उनकी “परिष्कृत शब्दावली” (refined vocabulary) पर केवल उनका ही अधिकार है।

जस्टिस मिनी पुष्करणा ने थरूर की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश जारी किया। थरूर ने उन ‘सोफिस्टिकेटेड’ डीपफेक वीडियो के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जिनमें उन्हें पाकिस्तान की कूटनीति की तारीफ करते हुए दिखाया गया था।

कोर्ट का यह आदेश केवल फोटो या वीडियो तक सीमित नहीं है। अदालत ने थरूर के नाम, उनकी छवि, विशिष्ट आवाज और उनके “सिग्नेचर ओरेटोरिकल स्टाइल” (बोलने की विशिष्ट शैली) के अनधिकृत इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। जस्टिस पुष्करणा ने कहा कि थरूर एक प्रतिष्ठित सार्वजनिक व्यक्ति हैं और उनकी छवि या व्यक्तित्व के किसी भी हिस्से का बिना अनुमति इस्तेमाल करना उनके सम्मान को ठेस पहुँचाने जैसा है।

अदालत ने जोर देकर कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत व्यक्तित्व और प्रचार अधिकार (Personality and Publicity Rights) सुरक्षित हैं। किसी सार्वजनिक हस्ती की विशेषताओं की अनधिकृत क्लोनिंग को निजता के अधिकार का उल्लंघन माना गया है।

शशि थरूर की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अमित सिब्बल और लॉ फर्म ‘ट्राइलीगल’ ने दलील दी कि यह अभियान मार्च 2026 के आसपास शुरू हुआ था। यह वह समय था जब थरूर केरल विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार कर रहे थे। याचिका में कहा गया कि इन ‘हाइपर-रियलिस्टिक’ वीडियो के जरिए उनकी देशभक्ति पर सवाल उठाने और चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर करने की कोशिश की गई थी।

हाई कोर्ट ने प्रमुख टेक कंपनियों के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं:

  • X (पूर्व में ट्विटर): कोर्ट ने प्लेटफॉर्म को आदेश दिया है कि वह मुकदमे में पहचाने गए सभी आपत्तिजनक लिंक को तुरंत हटाए और उन पर रोक लगाए।
  • मेटा (Meta): इंस्टाग्राम पर मौजूद उन रील्स को ब्लॉक रखने का निर्देश दिया गया है जिन्हें पहले ही एक्सेस से बाहर कर दिया गया था।
  • डाटा का खुलासा: दोनों प्लेटफॉर्म्स को तीन सप्ताह के भीतर उन लोगों की पहचान (IP लॉग-इन, फोन नंबर और ईमेल) थरूर को देनी होगी, जिन्होंने ये वीडियो अपलोड किए थे।
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यह फैसला भारत में व्यक्तित्व अधिकारों के क्षेत्र में एक नई मिसाल पेश करता है। शशि थरूर अब उन चुनिंदा हस्तियों की सूची में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने अपनी पहचान की सुरक्षा के लिए कानूनी जीत हासिल की है। इससे पहले अमिताभ बच्चन, ऐश्वर्या राय, सलमान खान और गौतम गंभीर जैसे सितारे भी अपनी छवि के व्यावसायिक या गलत इस्तेमाल के खिलाफ हाई कोर्ट से राहत पा चुके हैं।

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कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे जनरेटिव एआई (Generative AI) का दायरा बढ़ रहा है, यह मामला डिजिटल पहचान और निजता की सीमाओं को तय करने में मील का पत्थर साबित होगा।

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