असम से बिना रजिस्ट्रेशन वाली गाड़ी में 60 किलोग्राम से अधिक गांजा लेकर बिहार पहुंचने के मामले में पटना हाईकोर्ट ने सुरक्षा व्यवस्था में हुई भारी चूक पर गहरी चिंता जताई है। अदालत ने आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर किए जाने वाले प्रशासनिक दावों को एक दिखावा करार देते हुए पटना के एसएसपी को पूरे मामले की तीन महीने के भीतर जांच पूरी करने का निर्देश दिया है।
सुरक्षा में गंभीर चूक पर अदालत की तल्ख टिप्पणी
जस्टिस अरुण कुमार झा की एकल पीठ ने 15 सितंबर को यह आदेश एक नाबालिग की ओर से दाखिल रिवीजन याचिका को स्वीकार करते हुए दिया। अदालत ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि बिना रजिस्ट्रेशन वाली एक कार असम से चलकर बिना किसी रोक-टोक के बिहार में पटना के बाहरी इलाके तक पहुंच गई और उसमें व्यावसायिक मात्रा में गांजा लदा था। पीठ ने चेताया कि इस तरह की लापरवाही के चलते वाहन में विस्फोटक भी लाए जा सकते थे, जिससे आम लोगों के जीवन को भारी खतरा हो सकता था।
दीदारगंज में डीआरआई ने पकड़ी थी 60 किलो से ज्यादा खेप
यह पूरा घटनाक्रम पिछले साल का है, जब राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने पटना के बाहरी इलाके दीदारगंज में एक कार को रोका था। इस वाहन में सिर्फ पटना जिले के रहने वाले दो नाबालिग लड़के सवार थे। कार का कोई रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट नहीं था और दोनों में से किसी के पास ड्राइविंग लाइसेंस भी मौजूद नहीं था। तलाशी के दौरान कार के भीतर बने एक गुप्त तहखाने से 109 पैकेट बरामद किए गए, जिनमें 60 किलोग्राम से अधिक गांजा भरा हुआ था।
एनडीपीएस के तहत कार्रवाई और जमानत का विवाद
बरामदगी के बाद दोनों के खिलाफ एनडीपीएस कानून के तहत मामला दर्ज किया गया और जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने उन्हें कानून से संघर्षरत बच्चे घोषित कर दिया। बाद में बोर्ड ने एक किशोर को तो जमानत दे दी, लेकिन दूसरे की अर्जी खारिज कर दी। इसके बाद दूसरे आरोपी ने हाईकोर्ट का रुख करते हुए रिवीजन याचिका दायर की थी।
उम्र के दावों की पड़ताल और फर्जीवाड़े पर कार्रवाई की छूट
याचिकाकर्ता को जमानत देते हुए हाईकोर्ट ने उसके उस दावे पर गंभीर संदेह जताया, जिसमें उसने कहा था कि वह कभी किसी स्कूल में नहीं गया, इसलिए उम्र के सत्यापन के लिए कोई शैक्षणिक दस्तावेज नहीं दे सकता। अदालत ने टिप्पणी की कि आज के समय में ऐसी बात पर भरोसा करना मुश्किल है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने पटना एसएसपी को दोनों आरोपियों की वास्तविक उम्र की गहन जांच करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में यह सामने आता है कि उन्होंने उम्र से जुड़े तथ्य छुपाए हैं या कोई धोखाधड़ी की है, तो सरकार जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में अर्जी देकर उनकी जमानत रद्द कराने और उन्हें नाबालिग घोषित करने वाले आदेश की समीक्षा की मांग कर सकती है।

