उड़ीसा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में 16 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता और उसकी मां के निर्णय का सम्मान करते हुए नाबालिग को अपना 31 सप्ताह का गर्भ जारी रखने की अनुमति दे दी है। मेडिकल विशेषज्ञों द्वारा गर्भावस्था के इस उन्नत चरण में गर्भपात (Medical Termination) से जुड़े गंभीर जोखिमों, जिसमें मातृ मृत्यु की संभावना भी शामिल थी, की चेतावनी के बाद यह निर्णय लिया गया। अदालत ने राज्य के अधिकारियों को सुरक्षित प्रसव के लिए नाबालिग को मुफ्त चिकित्सा, पोषण और देखभाल प्रदान करने का निर्देश दिया है।
अदालती रिकॉर्ड के अनुसार, नाबालिग लड़की को वर्ष 2025 में एक ही आरोपी द्वारा दो बार अगवा किया गया था। सबसे पहले उसे जून में अगवा किया गया था, जिसके बाद पुलिस ने उसे रेस्क्यू कर बाल कल्याण समिति की कस्टडी में सौंप दिया था। जुलाई में लड़की को उसके माता-पिता के हवाले कर दिया गया। इसके बाद अगस्त महीने में उसी आरोपी ने कथित तौर पर फिर से उसका अपहरण कर लिया। सितंबर 2025 में नाबालिग की मां की शिकायत पर प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की गई।
इसके बाद माता-पिता ने अपनी बेटी की बरामदगी के लिए उड़ीसा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। दिसंबर तक लड़की को रेस्क्यू कर लिया गया और बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया, जिसके बाद जनवरी 2026 में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने उस बंदी प्रत्यक्षीकरण/रेस्क्यू याचिका का निस्तारण कर दिया। हालांकि, रेस्क्यू के समय हुई मेडिकल जांच में यह पाया गया कि नाबालिग गर्भवती थी।
चूंकि नाबालिग यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत अपराधों की पीड़िता है, इसलिए माता-पिता और नाबालिग ने इस अनचाहे गर्भ को चिकित्सकीय रूप से समाप्त करने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में एक नई याचिका दायर की।
याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अप्रैल में एक अंतरिम आदेश के माध्यम से अस्पताल के निदेशक को एक उचित मेडिकल बोर्ड का गठन करने और लड़की के स्वास्थ्य की जांच कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था।
जांच के बाद मेडिकल बोर्ड ने गर्भपात के खिलाफ सलाह दी। रिपोर्ट में इस तथ्य पर प्रकाश डाला गया कि पीड़िता की गर्भावस्था 30 सप्ताह और 4 दिन के उन्नत चरण (Advanced Stage) में है और भ्रूण पूरी तरह व्यवहार्य (Viable) है। संबंधित डॉक्टर ने राय दी कि इस चरण में गर्भपात करने में कई बड़े स्वास्थ्य जोखिम शामिल हैं, जिनमें ‘पोस्टपार्टम हेमरेज’ (Postpartum Haemorrhage) और ‘डिसेमिनेटेड इंट्रावास्कुलर कोगुलेशन’ शामिल हैं।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि गर्भपात की स्थिति में मृत बच्चे के जन्म का खतरा है, जो गर्भावस्था को आगे बढ़ाने की तुलना में मां के लिए बहुत अधिक जोखिम पैदा करेगा, और इससे गर्भवती मां की मृत्यु तक हो सकती है।
इन गंभीर चिकित्सकीय चेतावनियों को देखते हुए, नाबालिग और उसकी मां ने अदालत के समक्ष एक मेमो दाखिल किया। उन्होंने गर्भ की अवधि पूरी होने तक और सुरक्षित प्रसव होने तक गर्भावस्था को जारी रखने के लिए अपनी औपचारिक सहमति व्यक्त की।
जस्टिस बी.पी. राउतराय ने 8 मई को पारित अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जब कोई नाबालिग गर्भवती होती है, तो उन्नत चरण में भी गर्भपात के संबंध में कानूनी विकल्प चुनने में उसके माता-पिता या कानूनी अभिभावक की राय सबसे अधिक मायने रखती है, बशर्ते यह गर्भवती मां के स्वास्थ्य और जीवन के जोखिमों के अधीन हो।
अदालत ने अपने आदेश में दर्ज किया: “पीड़िता की मां ने, गर्भपात में शामिल इतने बड़े जोखिम को ध्यान में रखते हुए, अपनी पसंद से, नाबालिग लड़की के साथ, गर्भ की अवधि पूरी होने पर बच्चे के सुरक्षित प्रसव तक गर्भावस्था को जारी रखने का विकल्प चुना है, और उन्होंने अपनी सहमति व्यक्त करते हुए एक मेमो दायर किया है।”

