‘सीक्रेट एफआईआर’ विवाद: बीजेपी सांसद संदीप पाठक को हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत, 15 मई तक गिरफ्तारी पर रोक

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्यसभा सांसद संदीप पाठक को एक बड़ी राहत देते हुए उनकी अंतरिम सुरक्षा की अवधि को 15 मई तक बढ़ा दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई तक पंजाब सरकार उनके खिलाफ कोई भी दंडात्मक या कठोर कार्रवाई नहीं कर सकेगी।

मुख्य न्यायाधीश शील नागू की पीठ ने यह आदेश सोमवार को उस समय जारी किया, जब पंजाब सरकार की ओर से पेश वकील ने पाठक की याचिका पर अपना औपचारिक जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की। कोर्ट ने निर्देश दिया कि 8 मई को जारी किया गया पिछला अंतरिम आदेश आगामी सुनवाई तक प्रभावी रहेगा।

यह कानूनी विवाद उन ‘सीक्रेट’ एफआईआर को लेकर है, जिनके बारे में संदीप पाठक का दावा है कि पंजाब पुलिस ने उन्हें बिना किसी सूचना के दर्ज किया है। आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़कर हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए पाठक ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनकी मांग है कि सरकार को उन सभी मामलों का पूरा विवरण “तत्काल सार्वजनिक” करने का आदेश दिया जाए, जो उनके खिलाफ दर्ज किए गए हैं।

पाठक की याचिका के अनुसार, उन्हें इन कानूनी कार्यवाहियों के बारे में किसी आधिकारिक नोटिस के बजाय मीडिया रिपोर्ट्स और अनौपचारिक सूत्रों से पता चला। याचिका में आरोप लगाया गया है कि एफआईआर नंबर, तारीख और संबंधित पुलिस स्टेशनों जैसी महत्वपूर्ण जानकारी को जानबूझकर छिपाया गया है। उनके वकील का तर्क है कि इन एफआईआर को पंजाब पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड न करना पारदर्शिता के अनिवार्य नियमों का “घोर उल्लंघन” है।

सांसद की कानूनी टीम ने इसे राज्य के बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच एक सोची-समझी “राजनीतिक प्रतिशोध” की कार्रवाई करार दिया है।

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गौरतलब है कि संदीप पाठक उन सात राज्यसभा सांसदों में से एक थे, जिन्होंने 24 अप्रैल को अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली ‘आप’ से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया था। इस सामूहिक इस्तीफे को आम आदमी पार्टी के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा गया था। इस्तीफा देने वाले सांसदों ने आरोप लगाया था कि पार्टी अपने मूल सिद्धांतों और आदर्शों से भटक गई है।

इस समूह में पंजाब के छह बड़े चेहरे—संदीप पाठक, राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता और विक्रमजीत साहनी—शामिल थे, साथ ही दिल्ली से स्वाति मालीवाल ने भी पार्टी छोड़ी थी।

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8 मई को हुई पिछली सुनवाई के दौरान, पंजाब सरकार ने कोर्ट को आश्वासन दिया था कि न्यायिक अनुमति के बिना पाठक के खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठाया जाएगा। अब, जब सरकार ने और समय मांगा है, हाईकोर्ट ने फिलहाल तीन दिनों के लिए उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कर दी है।

बुधवार को होने वाली अगली सुनवाई में अदालत इस बात पर फैसला कर सकती है कि क्या पंजाब सरकार को उन कथित एफआईआर का पूरा विवरण सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा या नहीं।

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