कलकत्ता हाई कोर्ट के गलियारों में गुरुवार दोपहर उस समय अभूतपूर्व अराजकता की स्थिति पैदा हो गई, जब पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को वकीलों के एक उग्र समूह के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। एक महत्वपूर्ण कानूनी सुनवाई के बाद कोर्ट रूम से बाहर निकलते समय वकीलों ने उनके खिलाफ ‘चोर’ ‘चोर’ के अपमानजनक नारे लगाए, जिससे परिसर में तनाव फैल गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह घटना उस समय हुई जब ममता बनर्जी, वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी और पूर्व मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य के साथ अदालत परिसर से बाहर जाने की कोशिश कर रही थीं। वकीलों के एक समूह ने न केवल उनके खिलाफ नारेबाजी की, बल्कि उनका रास्ता रोकने का भी प्रयास किया। इस विरोध प्रदर्शन के चलते टीएमसी की लीगल टीम को पूर्व मुख्यमंत्री को सुरक्षित बाहर निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
घटना के बाद मीडिया से बात करते हुए टीएमसी नेता और अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने इस हंगामे के लिए सीधे तौर पर भाजपा (BJP) को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि हंगामा करने वाले वकील विपक्षी दल के प्रभाव में काम कर रहे थे और यह पूरी घटना पूर्व मुख्यमंत्री को अपमानित करने और अदालत के माहौल को खराब करने की एक सोची-समझी कोशिश थी।
कल्याण बनर्जी ने कहा, “न्याय के मंदिर का इस्तेमाल सार्वजनिक रूप से कीचड़ उछालने के लिए करना बेहद निंदनीय है। यह घटना बंगाल में टीएमसी कार्यकर्ताओं के खिलाफ मौजूदा शत्रुतापूर्ण माहौल का ही एक उदाहरण है।”
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 2026 के विधानसभा चुनावों के बाद हुई कथित हिंसा से संबंधित एक जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई के सिलसिले में व्यक्तिगत रूप से अदालत में मौजूद थीं। अधिवक्ता शीर्षान्या बंद्योपाध्याय द्वारा दायर इस याचिका में दावा किया गया है कि चुनाव परिणामों के बाद टीएमसी के सदस्यों, कार्यालयों और समर्थकों पर व्यापक और व्यवस्थित तरीके से हमले किए गए हैं।
इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सुजय पाल और न्यायमूर्ति पार्थसारथी सेन की खंडपीठ कर रही है। अदालत वर्तमान में इस याचिका के तथ्यों और इसकी गंभीरता पर विचार कर रही है।

