महाराष्ट्र राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने नवी मुंबई स्थित एक डेंटिस्ट्री क्लिनिक और उसके कंसल्टिंग डेंटिस्ट को मरीज के साथ लापरवाही बरतने और गलत इलाज करने का दोषी ठहराया है। आयोग ने ठाणे जिला उपभोक्ता फोरम के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें क्लिनिक को पीड़िता को 6.32 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था।
राज्य आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एस पी तावड़े और सदस्य डॉ. निशा अमोल चव्हाण की पीठ ने ‘सबका डेंटिस्ट’ क्लिनिक और इलाज करने वाली डॉक्टर की अपील खारिज करते हुए यह आदेश दिया। मुआवजे की राशि में सुधारात्मक इलाज पर हुए 4.32 लाख रुपये के खर्च के अलावा मानसिक उत्पीड़न और अदालती कार्यवाही के लिए 2 लाख रुपये शामिल हैं। आयोग ने निर्देश दिया है कि इस राशि पर 20 अक्टूबर 2022 से 12 प्रतिशत सालाना दर से ब्याज दिया जाए और 7 अगस्त के आदेश के 45 दिनों के भीतर इस भुगतान को पूरा किया जाए।
रूट कैनाल की जरूरत साबित करने में नाकाम रहा क्लिनिक
यह मामला 21 जुलाई 2018 से 30 जनवरी 2019 के बीच कराए गए इलाज से जुड़ा है। महिला मरीज शुरुआत में मामूली फिलिंग ठीक कराने और स्माइल डिजाइनिंग के लिए क्लिनिक गई थी। हालांकि, क्लिनिक ने उन्हें नौ दांतों में रूट कैनाल कराने और उन पर क्राउन (कैप) लगाने की सलाह दी।
अपने 7 अगस्त के फैसले में राज्य आयोग ने पाया कि क्लिनिक ऐसा कोई प्रामाणिक मेडिकल दस्तावेज या एक्स-रे रिपोर्ट पेश नहीं कर सका, जिससे नौ दांतों में रूट कैनाल करने की चिकित्सीय आवश्यकता साबित होती हो। आयोग ने कहा कि बिना किसी डायग्नोस्टिक जांच और पूर्व प्रमाण के दांतों के स्वस्थ हिस्से (पल्प) को निकालना डॉक्टरी इलाज के तय मानकों का उल्लंघन और लापरवाही है।
क्राउन की ऊंचाई ज्यादा घिसने से टूटे दांत, वारंटी से भी किया इनकार
दूसरे डेंटल क्लिनिक की स्वतंत्र जांच और सुधारात्मक इलाज के रिकॉर्ड से यह सामने आया कि क्राउन लगाने के दौरान डॉक्टर ने मरीज के प्राकृतिक दांतों को जरूरत से ज्यादा घिसकर छोटा कर दिया था। आयोग के अनुसार, दांतों की ऊंचाई अत्यधिक कम कर देने से उनकी मजबूती खत्म हो गई, जिसके कारण लगाए गए क्राउन एक साल के भीतर ही बार-बार निकलने और टूटने लगे।
मरीज ने करीब 1.75 लाख रुपये खर्च करके जिरकोनिया (Zirconia) क्राउन लगवाए थे, जिन पर क्लिनिक ने 15 साल की वारंटी देने का दावा किया था। जब ये क्राउन खराब हुए, तो क्लिनिक ने वारंटी के तहत इनकी मरम्मत या बदलाव करने से मना कर दिया। इसके अलावा, महिला को दिए गए छह गारंटी कार्डों पर अन्य मरीजों के नाम और ब्योरे दर्ज थे। आयोग ने माना कि वारंटी अवधि के दौरान सेवा देने से इनकार करना और दूसरे मरीजों के कार्ड देना सेवा में गंभीर कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice) है।
डेंटिस्ट और क्लिनिक की दलीलों को आयोग ने किया खारिज
बचाव पक्ष में क्लिनिक और डॉक्टर ने तर्क दिया था कि पूरा इलाज मरीज की सहमति, तय इलाज योजना और मेडिकल मानकों के तहत किया गया था तथा रूट कैनाल के हर चरण में एक्स-रे लिए गए थे। डॉक्टर का यह भी कहना था कि क्राउन के लिए दांतों की ऊंचाई का आकलन एक व्यक्तिगत क्लिनिकल निर्णय होता है और 15 साल की वारंटी केवल कैप पर लागू होती है, न कि दांत की आंतरिक संरचना पर।
डेंटिस्ट ने यह भी दावा किया कि मरीज के चार दांतों में पुरानी फिलिंग टूटी हुई थी, इलाज के बाद उन्हें संवेदनशीलता (Sensitivity) की शिकायत थी और वे फॉलो-अप बैठकों में नहीं आईं। उनका कहना था कि 17 में से केवल एक ही क्राउन निकला था, क्योंकि अंदरूनी दांत में फ्रैक्चर हो गया था।
हालांकि, राज्य उपभोक्ता आयोग ने इन सभी तर्कों को अमान्य घोषित कर दिया। आयोग ने जिला फोरम के 20 अक्टूबर 2022 के फैसले को पूरी तरह सही ठहराते हुए अपील को खारिज कर दिया और क्लिनिक तथा डॉक्टर को पूरा मुआवजा देने के लिए उत्तरदायी माना।

