दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को कथित नागा विद्रोही मसाससोंग आओ को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच वाले मनी लॉन्ड्रिंग मामले में नियमित जमानत दे दी। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस संजीव नरूला ने आओ की जमानत अर्जी मंजूर कर ली। अदालत के इस निर्णय की विस्तृत प्रति अभी आना बाकी है।
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राहत मिलने के बावजूद मसाससोंग आओ को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। वह गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून (यूएपीए) के तहत दर्ज एक अलग आतंकी मामले का सामना कर रहा है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने यूएपीए केस में उसे फरवरी 2020 में गिरफ्तार किया था, जिसके बाद से वह लगातार न्यायिक हिरासत में है।
हवाई अड्डे पर नकदी बरामदगी से शुरू हुई थी जांच
इस मामले की शुरुआत 17 दिसंबर 2019 को दिल्ली हवाई अड्डे पर अलमला जमीर के पकड़े जाने के साथ हुई थी। प्रतिबंधित अलगाववादी संगठन ‘नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड (इसाक-मुइवा)’ यानी एनएससीएन-आईएम की स्वयंभू ‘कैबिनेट मंत्री’ जमीर को सुरक्षा एजेंसियों ने उस समय रोका था, जब वह 72 लाख रुपये नकद लेकर दीमापुर जाने की तैयारी में थी।
हवाई अड्डे पर हुई इस जब्ती और यूएपीए के तहत दर्ज प्राथमिक मामले के आधार पर ईडी ने साल 2021 में मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था। इसके बाद वित्तीय जांच एजेंसी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत साल 2022 में मसाससोंग आओ को भी गिरफ्तार कर लिया।
जबरन वसूली और आतंकी फंडिंग के आरोप
एनआईए की जांच के अनुसार, मसाससोंग आओ और विद्रोही संगठन के अन्य सदस्यों ने अलमला जमीर के साथ मिलकर जबरन वसूली का नेटवर्क चलाया। एजेंसी का आरोप है कि आरोपियों ने आतंकी गतिविधियों के लिए फंड जुटाने, उसकी हेराफेरी करने और शांति भंग करने वाली गतिविधियों को अंजाम देने में भूमिका निभाई।

