ज्योलीकोट और आसपास के ग्रामीण इलाकों में दूषित पानी के कारण फैले पीलिया के प्रकोप पर कड़ा रुख अपनाते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मंगलवार को इसे ‘महामारी’ करार दिया। अदालत ने स्थानीय प्रशासन को प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति और पुख्ता चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।
जस्टिस मनोज कुमार तिवारी और जस्टिस सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने इस मामले में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए नैनीताल के जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल को स्वयं राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी करने का आदेश दिया। अदालत ने स्वास्थ्य संकट पर गहरी चिंता जाहिर करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे केवल विभागीय जांच पर निर्भर रहने के बजाय पीने के पानी के नमूनों की जांच निजी प्रयोगशालाओं से कराएं।
सीवेज और पेयजल लाइनों को अलग रखने का आदेश
पेयजल व्यवस्था की गंभीर खामियों पर सख्ती दिखाते हुए खंडपीठ ने जल संस्थान और पेयजल निगम को निर्देश दिया कि सीवेज और पीने के पानी की आपूर्ति लाइनें किसी भी सूरत में एक-दूसरे से न मिलें। इसके साथ ही अदालत ने नैनीताल शहर के भीतर भी सीवेज लीकेज की पड़ताल और पानी की गुणवत्ता का निरीक्षण करने के निर्देश दिए। अधिकारियों को शहर के 20 से 25 अलग-अलग स्थानों से पानी के नमूने एकत्र कर उनकी जांच कराने को कहा गया है। इसके अलावा, हाईकोर्ट ने विभागीय सचिव को कुमाऊं मंडल में एक स्थायी जल परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित करने के प्रस्ताव पर जल्द फैसला लेने का निर्देश दिया।
ग्रामीण क्षेत्रों में दहशत और दो मौतें
अदालत में यह कानूनी प्रक्रिया अधिवक्ता और याचिकाकर्ता रवि बिष्ट की याचिका पर शुरू हुई, जिन्होंने सुनवाई के दौरान क्षेत्र में पानी की भयावह स्थिति दर्शाने वाली दस से अधिक मेडिकल रिपोर्ट खंडपीठ के समक्ष पेश कीं। याचिका में बताया गया कि जलजनित बीमारी का यह प्रकोप ज्योलीकोट, बेलुवाखान, गेठिया, सड़ियाताल, दुर्गापुर, गांजा, वीरभट्टी, छीना और इनके नजदीकी गांवों में तेजी से फैला है। इलाके में बड़ी संख्या में लोग पीलिया की चपेट में हैं। हाल ही में एक 16 वर्षीय छात्र और 26 वर्षीय महिला की इस बीमारी से हुई मौतों के बाद स्थानीय ग्रामीणों में भारी दहशत का माहौल है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती और राहत कार्य
अदालत के समक्ष उपस्थित होकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. रश्मि पंत ने पुष्टि की कि दूषित पेयजल के सेवन की वजह से ही यह बीमारी फैली है। चिकित्सा सुविधाओं पर निर्देश देते हुए खंडपीठ ने कहा कि यदि स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध नहीं हैं, तो प्रशासन तुरंत बाहर से विशेषज्ञ डॉक्टर बुलाए।
सीएमओ डॉ. पंत ने अदालत को अवगत कराया कि प्रभावित मरीजों का इलाज आयुष्मान योजना के तहत किया जाएगा। उन्होंने जानकारी दी कि प्रभावित इलाके में आठ डॉक्टरों और एक एम्बुलेंस की तैनाती की गई है। इसके साथ ही सात गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर क्लोरीन की गोलियां और ओआरएस के पैकेट बांट रही हैं।
सुनवाई के दौरान अदालत ने जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, सीएमओ डॉ. रश्मि पंत, जल संस्थान के अधीक्षण अभियंता विशाल कुमार, पेयजल निगम के अधीक्षण अभियंता अनीश कुमार और मुख्य अभियंता आलोक के पक्ष सुने। हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को तय की है।

