छात्रा की हथेली पर मारना, शील भंग करने की मंशा के बिना, धारा 354 IPC का अपराध नहीं: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने कहा है कि कक्षा के दौरान किसी छात्रा की हथेली पर मारना या थपकी देना, यदि उसके पीछे महिला की लज्जा भंग करने की आवश्यक मंशा नहीं है, तो भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत अपराध नहीं बनता। जस्टिस जोबिन सेबेस्टियन ने स्कूल ऑफ ड्रामा एंड फाइन आर्ट्स, त्रिशूर में एक छात्रा की हथेली पर मारने के आरोप में एक विजिटिंग फैकल्टी के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी।

हाईकोर्ट ने कहा कि यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों को पूरी तरह सही मान भी लिया जाए, तब भी धारा 354 IPC के लिए जरूरी आपराधिक मंशा यानी mens rea सामने नहीं आती।

मामले की पृष्ठभूमि

अभियोजन के अनुसार घटना 21 नवंबर 2021 की है। उस समय याचिकाकर्ता स्कूल ऑफ ड्रामा एंड फाइन आर्ट्स कॉलेज, त्रिशूर में शिकायतकर्ता छात्रा की कक्षा ले रहा था। आरोप था कि उसने छात्रा की हथेली पर मारा और इस तरह उसकी लज्जा भंग की।

विभागाध्यक्ष को भी दूसरे आरोपी के रूप में मामले में शामिल किया गया था। आरोप था कि छात्रा द्वारा घटना की शिकायत किए जाने के बाद उन्होंने फोन पर अशोभनीय शब्दों का इस्तेमाल किया और उसकी लज्जा का अपमान करने की मंशा से बात की।

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इस आधार पर त्रिशूर वेस्ट पुलिस स्टेशन में क्राइम नंबर 209/2022 दर्ज किया गया और IPC की धारा 354 तथा 354A के तहत अपराध लगाए गए।

याचिकाकर्ता ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 528 के तहत हाईकोर्ट का रुख किया और FIR, फाइनल रिपोर्ट तथा ज्यूडिशियल फर्स्ट क्लास मजिस्ट्रेट कोर्ट-II, त्रिशूर में लंबित आगे की पूरी कार्यवाही रद्द करने की मांग की।

याचिकाकर्ता की दलील

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि वह ड्रामा और थिएटर आर्ट्स के क्षेत्र का शिक्षाविद है और उसे Early Malayalam Theatre पर ओरिएंटेशन क्लास लेने के लिए विजिटिंग फैकल्टी के रूप में बुलाया गया था।

उसका कहना था कि कक्षा के दौरान शिकायतकर्ता छात्रा उनींदी अवस्था में बैठी थी। उसे जगाने के उद्देश्य से उसने उसकी हथेली पर हल्के से मारा। इसी बात से नाराज होकर उसके खिलाफ मामला दर्ज कराया गया।

याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि प्रथम सूचना बयान को सामान्य रूप से पढ़ने पर भी धारा 354 IPC के आवश्यक तत्व नहीं बनते। यह भी बताया गया कि मामले के दूसरे आरोपी को हाईकोर्ट पहले ही धारा 528 BNSS के तहत राहत दे चुका है।

सीनियर पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने याचिका का विरोध किया।

हाईकोर्ट का विश्लेषण

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हाईकोर्ट ने शुरुआत में कहा कि BNSS की धारा 528 के तहत निहित शक्तियां, जो पहले CrPC की धारा 482 के अनुरूप हैं, असाधारण प्रकृति की हैं। इनका इस्तेमाल सावधानी और सीमित परिस्थितियों में ही किया जाना चाहिए, खासकर तब जब न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग को रोकना हो या न्याय के उद्देश्य को पूरा करना हो।

कोर्ट ने कहा कि यदि शिकायत या प्रथम सूचना बयान में लगाए गए आरोपों को सही मानने पर भी कोई अपराध नहीं बनता, तो आपराधिक कार्यवाही रद्द की जा सकती है। हालांकि इस स्तर पर हाईकोर्ट को साक्ष्यों का बारीकी से मूल्यांकन या mini-trial नहीं करना चाहिए।

कोर्ट ने ध्यान दिया कि प्रथम सूचना बयान के अनुसार भी कथित घटना एक कक्षा के दौरान हुई थी, जहां कई अन्य छात्र और छात्राएं मौजूद थे।

धारा 354 IPC के संदर्भ में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि महिला की लज्जा भंग करने की मंशा इस अपराध का अनिवार्य तत्व है।

“इसलिए, महिला की लज्जा भंग करने की मंशा IPC की धारा 354 के अपराध को लागू करने के लिए अनिवार्य शर्त है।”

मामले के तथ्यों पर इसे लागू करते हुए कोर्ट ने कहा कि आरोप केवल इतना था कि याचिकाकर्ता ने कक्षा के दौरान छात्रा की हथेली पर मारा। याचिकाकर्ता का स्पष्ट कहना था कि उसने ऐसा केवल उसे उनींदी अवस्था से जगाने के लिए किया था।

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हाईकोर्ट ने कहा कि आरोप को उसके मूल रूप में सही मान लेने पर भी, प्रथम सूचना बयान में बताए गए हालात धारा 354 IPC के आवश्यक तत्व पूरे नहीं करते क्योंकि शिकायतकर्ता की लज्जा भंग करने की जरूरी मंशा दिखाई नहीं देती।

जस्टिस सेबेस्टियन ने आगे कहा:

“आरोपों को पूरी तरह सही मान लेने पर भी वे IPC की धारा 354 के तहत अपराध बनाने के लिए आवश्यक mens rea को प्रकट नहीं करते।”

हाईकोर्ट का फैसला

हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए याचिकाकर्ता के खिलाफ दर्ज FIR, फाइनल रिपोर्ट और C.C. No. 738 of 2022 में लंबित आगे की पूरी कार्यवाही रद्द कर दी। यह आदेश BNSS, 2023 की धारा 528 के तहत शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए पारित किया गया।

केस टाइटल: राजा वारियर बनाम स्टेट ऑफ केरल एवं अन्य
केस नंबर: Crl.M.C. No. 5421 of 2026
बेंच: जस्टिस जोबिन सेबेस्टियन
तारीख: 22 सितंबर 2026

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