केरल हाईकोर्ट का फैसला: बिना कानूनी प्रावधान के अक्षय केंद्रों के आवंटन में दिव्यांग आरक्षण अनिवार्य नहीं

केरल हाईकोर्ट ने राज्य में नए अक्षय केंद्रों (Akshaya Centres) के आवंटन में दिव्यांगजनों के लिए आरक्षण की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक कोई विशिष्ट कानून या सरकारी आदेश मौजूद न हो, तब तक ठेकेदारी या अनुबंध के आधार पर दिए जाने वाले आवंटन में आरक्षण लागू करना राज्य के लिए अनिवार्य नहीं है।

28 जुलाई को पारित अपने आदेश में जस्टिस बीचू कुरियन थॉमस ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 16 के तहत अवसर की समानता का सिद्धांत केवल सार्वजनिक रोजगार पर लागू होता है। ठेकेदारों या स्वतंत्र उद्यमियों के चयन में यह नियम प्रभावी नहीं होता। कोर्ट ने टिप्पणी की कि हालांकि सरकार कानून या कार्यकारी आदेशों के जरिए विशेष श्रेणियों के लिए प्रावधान बना सकती है, लेकिन ऐसा नियम न होने मात्र से अनुबंध आधारित चयन प्रक्रिया अवैध नहीं हो जाती।

आरक्षण न देने पर याचिकाकर्ता की आपत्ति

यह मामला राज्य भर में 912 नए अक्षय केंद्र स्थापित करने के लिए जारी एक अधिसूचना के खिलाफ दायर किया गया था। 60 प्रतिशत लोकोमोटर दिव्यांगता से पीड़ित एक आवेदक ने इस प्रक्रिया को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता पीए मोहम्मद शाह और सहल शाजहान ने तर्क दिया कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के तहत आरक्षण, छूट या प्राथमिकता न देना असंवैधानिक है। उन्होंने कहा कि इससे पहले से ही वंचित वर्ग सरकारी सशक्तिकरण पहलों में भाग लेने से वंचित रह जाएगा।

सरकारी वकील का पक्ष और आगामी योजना

READ ALSO  अगर आशीष मिश्रा यूपी में राजनीतिक गतिविधियों में लिप्त पाए गए तो यह अंतरिम जमानत की शर्त का उल्लंघन होगा: सुप्रीम कोर्ट

राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए सरकारी वकील लाया मैरी जोसेफ ने कोर्ट को बताया कि नए केंद्रों में दिव्यांग आरक्षण शामिल करने के लिए सामाजिक न्याय विभाग को एक प्रस्ताव भेजा गया था। हालांकि, उस पर कोई जवाब न मिलने के कारण मौजूदा चयन प्रक्रिया में आरक्षण का प्रावधान नहीं जोड़ा जा सका। सरकारी वकील ने बताया कि सक्षम प्राधिकारियों द्वारा आवश्यक दिशा-निर्देश तैयार किए जाने के बाद लक्षित श्रेणियों के लिए एक विशेष चयन अभियान चलाया जाएगा।

अनुबंध आधारित व्यवस्था और कानूनी स्थिति

READ ALSO  In A Secular Country Like India Persons Declaring Themselves Non-Religous Should be Appreciated: Kerala HC

अदालत ने कहा कि अक्षय केंद्र का आवंटन केवल एक संविदात्मक व्यवस्था और निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करने वाले व्यक्तियों को दी जाने वाली एक विशेष सुविधा है। चूंकि यह कोई सरकारी नौकरी या पद पर नियुक्ति नहीं है, इसलिए किसी भी व्यक्ति को इसका आवंटन पाने का कानूनी अधिकार नहीं है। जस्टिस थॉमस ने उल्लेख किया कि अक्षय योजना या इसके मौजूदा दिशानिर्देशों में आरक्षण की कोई बाध्यता नहीं है, इसलिए याचिकाकर्ता के पास इस अधिसूचना को चुनौती देने का कोई आधार नहीं है।

अक्षय परियोजना का मुख्य उद्देश्य

READ ALSO  जहां चश्मदीद गवाह है और प्रत्यक्ष साक्ष्य है तो संबंधित मजिस्ट्रेट को एफआईआर भेजने में देरी महत्वहीन है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

अक्षय परियोजना केरल सरकार और केरल स्टेट आईटी मिशन की एक प्रमुख ई-गवर्नेंस पहल है। इसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर स्वरोजगार पैदा करना और नागरिकों को डिजिटल सेवाएं प्रदान करना है। कोर्ट ने रेखांकित किया कि यह योजना डिजिटल साक्षरता बढ़ाने और तकनीकी अंतर को खत्म करने का एक माध्यम है, न कि सरकारी नौकरियों के अवसर पैदा करने का ढांचा।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles