एचपी का खराब लैपटॉप ठीक न करने पर उपभोक्ता आयोग सख्त, ग्राहक को ब्याज समेत पूरे पैसे लौटाने का आदेश

हिमाचल प्रदेश के एक उपभोक्ता आयोग ने तकनीकी दिग्गज कंपनी एचपी इंडिया सेल्स प्राइवेट लिमिटेड (HP India) को आदेश दिया है कि वह अपने एक ग्राहक को लैपटॉप की पूरी कीमत वापस करे और साथ ही मानसिक प्रताड़ना व अदालती खर्च के लिए हर्जाना भी दे। आयोग ने स्पष्ट किया कि वारंटी पीरियड के दौरान भी खराब लैपटॉप को ठीक न कर पाना और बार-बार खराब होने वाला उत्पाद बेचना सेवा में गंभीर कोताही और अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है।

कांगड़ा जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष हिमांशु मिश्रा और सदस्यों आरती सूद व नारायण ठाकुर की पीठ ने पालमपुर के निवासी विवेक भट्ट की शिकायत पर यह फैसला सुनाया। आयोग ने एचपी इंडिया को लैपटॉप की खरीद कीमत 49,000 रुपये 9 फीसदी सालाना ब्याज के साथ लौटाने का निर्देश दिया है। इसके अलावा कंपनी को शिकायतकर्ता को हुई मानसिक प्रताड़ना के लिए 5,000 रुपये और कानूनी खर्च के रूप में 5,000 रुपये का भुगतान करना होगा। इस प्रकार कंपनी पर करीब 59,000 रुपये (ब्याज के अतिरिक्त) की कुल देनदारी तय की गई है।

पांच महीने में ही आने लगी थीं गंभीर खराबियां

विवेक भट्ट ने 8 सितंबर 2024 को चंडीगढ़ के शोरूम ‘जेटेज कंप्यूटर ट्रेडर्स’ से 49,000 रुपये में एचपी का लैपटॉप (मॉडल नंबर 15S-EQ2084AU) खरीदा था। इस लैपटॉप पर निर्माता कंपनी की ओर से एक साल की वारंटी दी गई थी। हालांकि, खरीदारी के महज पांच महीने के भीतर ही, यानी फरवरी 2025 में लैपटॉप की बैटरी तेजी से खत्म होने लगी और उसकी स्क्रीन भी लगातार झिलमिलाने (फ्लिकरिंग) लगी। विवेक की शिकायत पर कंपनी ने वारंटी के तहत बैटरी तो बदल दी, लेकिन स्क्रीन की खराबी वैसी ही बनी रही।

कंपनी के तकनीशियन ने भी माना था मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट

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इसके बाद विवेक ने मई से जुलाई 2025 के दौरान कई बार ऑनलाइन शिकायतें दर्ज कराईं। उन्होंने स्क्रीन के अलावा आवाज खराब होने, ब्राइटनेस कंट्रोल काम न करने, लैपटॉप के बार-बार हैंग होने, अपने आप रीस्टार्ट होने और बेज़ेल अलाइनमेंट बिगड़ने जैसी कई शिकायतें दर्ज कीं। 25 जुलाई 2025 को जब कंपनी के सर्विस इंजीनियर ने लैपटॉप की जांच की, तो उसने स्वीकार किया कि लैपटॉप में उत्पादन संबंधी बड़ी खराबी (मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट) है, जिसे सामान्य मरम्मत से ठीक करना संभव नहीं है। लगातार खराब हो रहे लैपटॉप से परेशान होकर अंततः विवेक भट्ट ने जिला उपभोक्ता आयोग का रुख किया।

सुनवाई से गायब रही एचपी इंडिया सेल्स

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आयोग द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद एचपी इंडिया ने शुरुआत में तो अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, लेकिन बाद में कंपनी की ओर से कोई भी सुनवाई में शामिल नहीं हुआ। इसके चलते आयोग ने कंपनी के खिलाफ एकतरफा (ex-parte) कार्रवाई करने का निर्णय लिया। वहीं, चंडीगढ़ के डीलर ‘जेटेज कंप्यूटर ट्रेडर्स’ को 17 अप्रैल 2026 को जारी एक आदेश के जरिए इस मामले की पक्षकारों की सूची से हटा दिया गया था। कंपनी द्वारा अपना पक्ष न रखने के कारण आयोग ने ग्राहक द्वारा पेश किए गए सभी दस्तावेजी सबूतों को सही और विश्वसनीय माना।

उपभोक्ताओं के अधिकारों पर आयोग का रुख

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आयोग ने अपने फैसले में कहा कि जब कंपनी के खुद के तकनीशियन ने लैपटॉप में स्थायी उत्पादन संबंधी खराबी की बात स्वीकार कर ली थी, तो इसके बाद जिम्मेदारी सीधे तौर पर निर्माता कंपनी पर आ जाती है। आयोग ने कहा कि ग्राहकों से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वे मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट वाले उत्पादों को बार-बार केवल मरम्मत के लिए ही सौंपते रहें। वारंटी के दौरान भी खराबी ठीक न करना साफ तौर पर सेवा में कमी को दर्शाता है।

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