एक ऐतिहासिक फैसले में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया है कि हाईकोर्टों को दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 482 के तहत अपनी अंतर्निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए मिनी ट्रायल नहीं करना चाहिए। यह निर्णय न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने धर्मबीर कुमार सिंह बनाम झारखंड राज्य
