नई कॉलोनियों में पुलिस स्टेशन, अस्पताल और फायर स्टेशन जैसी सुविधाओं के लिए बने व्यापक योजना: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने नई आवासीय कॉलोनियों और शहरों के विकास के दौरान आवश्यक सार्वजनिक सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है। कोर्ट ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA), उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद और लखनऊ नगर निगम को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि उनके लेआउट प्लान में पुलिस स्टेशन, फायर स्टेशन, अस्पताल, कचरा संग्रहण केंद्र और बिजली के ट्रांसफॉर्मर के लिए स्थान निर्धारित किए जाते हैं या नहीं।

जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की डिवीजन बेंच ने लेआउट प्लान, टाउन प्लानिंग और आवश्यक नागरिक सुविधाओं से संबंधित स्वतः संज्ञान जनहित याचिका का दायरा बढ़ाते हुए यह निर्देश दिया।

कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से हलफनामा दाखिल कर यह बताने को कहा है कि नई कॉलोनियों और शहरों की योजना तैयार करते समय नागरिकों की वर्तमान और भविष्य की जरूरतों को किस प्रकार ध्यान में रखा जाता है।

पुलिस स्टेशन, अस्पताल और फायर स्टेशन के लिए जगह निर्धारित करने पर जवाब तलब

हाईकोर्ट ने अधिकारियों से पूछा कि क्या आवासीय कॉलोनियों के लेआउट प्लान में पुलिस स्टेशन, पुलिस चौकी, पुलिस बूथ, ट्रैफिक बूथ, फायर स्टेशन और मेडिकल क्लीनिक या अस्पताल के लिए स्थान निर्धारित किए जाते हैं।

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बेंच ने यह भी स्पष्ट करने को कहा कि इन सुविधाओं की योजना बनाते समय बदलती जरूरतों और पहले विकसित की गई कॉलोनियों के अनुभवों को ध्यान में रखा जाता है या नहीं।

यदि लेआउट प्लान में इन सुविधाओं का प्रावधान नहीं है, तो अधिकारियों को बताना होगा कि इन्हें उपलब्ध कराने के लिए उनके पास क्या प्रस्ताव हैं।

कोर्ट ने भविष्य में विकसित होने वाली कॉलोनियों और शहरों के लिए नागरिकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एक व्यापक टाउन प्लानिंग रोडमैप तैयार करने का भी सुझाव दिया।

बिजली विभाग और अन्य एजेंसियों से समन्वय की जानकारी मांगी

हाईकोर्ट ने लेआउट प्लान तैयार करने के दौरान बिजली विभाग, निगमों और अन्य सरकारी एजेंसियों से किए जाने वाले परामर्श का विवरण भी मांगा है।

विशेष रूप से कोर्ट ने पूछा कि बिजली के ट्रांसफॉर्मर लगाने के लिए स्थान निर्धारित करते समय संबंधित विभागों से किस प्रकार समन्वय किया जाता है।

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अधिकारियों को उन विभागों, निगमों और सार्वजनिक उपक्रमों की जानकारी देनी होगी जिनसे योजना तैयार करने के दौरान परामर्श किया गया था। इसके साथ ही संबंधित नियम और दिशानिर्देश भी रिकॉर्ड पर प्रस्तुत करने होंगे।

लखनऊ नगर निगम को अलग से हलफनामा दाखिल कर यह सुझाव देने का निर्देश दिया गया है कि आवासीय कॉलोनियों के लेआउट प्लान में किन आवश्यक सुविधाओं को शामिल किया जाना चाहिए।

2025 के बिल्डिंग बायलॉज पर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश

सुनवाई के दौरान लखनऊ विकास प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद की ओर से पेश वकील ने बताया कि वर्ष 2025 में लागू किए गए बिल्डिंग बायलॉज में कचरा निस्तारण, ट्रांसफॉर्मर लगाने और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं से संबंधित प्रावधान मौजूद हैं।

हालांकि, वकील यह स्पष्ट नहीं कर सके कि ट्रांसफॉर्मर लगाने के लिए अलग से स्थान निर्धारित करने का कोई विशेष प्रावधान है या नहीं।

इस पर हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को हलफनामे के माध्यम से स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया।

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कचरा संग्रहण और सड़क किनारे ट्रांसफॉर्मर लगाने से जुड़ी समस्याएं

यह स्वतः संज्ञान जनहित याचिका शहरी नियोजन में कमियों, विशेष रूप से कचरा संग्रहण और बिजली के ट्रांसफॉर्मर के लिए निर्धारित स्थान की कमी को लेकर दर्ज की गई थी।

पिछली सुनवाई के दौरान नगर निगम ने कोर्ट को बताया था कि विकास प्राधिकरण अक्सर आवासीय कॉलोनियों के लेआउट प्लान में कचरा डालने या एकत्र करने के लिए जगह निर्धारित नहीं करते। इससे कॉलोनियों के विकसित होने के बाद समस्याएं पैदा होती हैं।

इसी तरह ट्रांसफॉर्मर के लिए स्थान निर्धारित नहीं होने के कारण उन्हें सड़कों के किनारे लगाना पड़ता है। इससे यातायात बाधित होता है और स्थानीय निवासियों को परेशानी होती है।

हाईकोर्ट ने पहले भी कहा था कि सार्वजनिक प्राधिकरणों द्वारा विकसित आवासीय कॉलोनियों में स्वस्थ, स्वच्छ और सुरक्षित जीवन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक नागरिक सुविधाओं की उपलब्धता जरूरी है।

मामले की अगली सुनवाई 7 दिसंबर को होगी।

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