गुजरात हाईकोर्ट ने आपराधिक मानहानि मामले में पत्रकार रवि नायर की गिरफ्तारी और गैर-जमानती वारंट को चुनौती देने वाली याचिका पर अडाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड को अपना जवाब दाखिल करने की अनुमति दी है। इसके साथ ही पीठ ने स्पष्ट किया कि इस मामले में आगे कोई स्थगन नहीं दिया जाएगा।
जस्टिस एम के ठक्कर ने मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर तय की है। इससे पहले शनिवार को अदालत ने नायर की याचिका पर नोटिस जारी किया था। सोमवार को सुनवाई के दौरान अडाणी एंटरप्राइजेज के वरिष्ठ वकील ने कुछ कानूनी और तथ्यात्मक पक्षों को रिकॉर्ड पर रखने के लिए समय मांगा।
नायर के वकील अभिक चिमनी ने इस मांग का विरोध करते हुए तत्काल अंतरिम राहत की गुहार लगाई। उन्होंने दलील दी कि मामला पहले से ही अपीलीय स्तर पर है और उनके मुवक्किल को एक दिन भी जेल में नहीं बिताना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि एक निजी शिकायतकर्ता होने के नाते अडाणी एंटरप्राइजेज बार-बार सुनवाई टालने की मांग नहीं कर सकती।
ओपन कोर्ट में दिए गए आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि नोटिस जारी होने के बाद शिकायतकर्ता की तरफ से पेशी हुई है, इसलिए उसे अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिलना चाहिए। हालांकि, अदालत ने साफ कर दिया कि यह दिया गया अंतिम मौका है और इसके बाद कोई नया स्थगन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
गिरफ्तारी और गैर-जमानती वारंट को चुनौती
हाईकोर्ट में दायर याचिका में रवि नायर ने गांधीनगर सेशंस कोर्ट के 17 सितंबर के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसके तहत गैर-जमानती वारंट रद्द करने की उनकी अर्जी खारिज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। इसके साथ ही उन्होंने 3 सितंबर के उस आदेश को भी चुनौती दी है, जिसमें सेशंस कोर्ट ने माना था कि वह लापता हैं और जानबूझकर गिरफ्तारी से बच रहे हैं।
याचिका के जरिए नायर ने सेशंस कोर्ट के 9 मार्च के उस आदेश को बहाल करने की मांग की है, जिसके तहत उन्हें जमानत दी गई थी और सजा को निलंबित कर दिया गया था।
सुनवाई के दौरान नायर के वकील ने अदालत को बताया कि उनके खिलाफ बिना किसी पूर्व नोटिस या समन के सीधे गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था। जब नायर वारंट रद्द कराने के लिए अपीलीय अदालत पहुंचे, तो उनकी अर्जी खारिज कर उन्हें हिरासत में ले लिया गया।
बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि नायर गुजरात के नहीं बल्कि केरल के निवासी हैं, जो गांधीनगर से काफी दूर है। ऐसे में हर तारीख पर व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए लंबी यात्रा करना उनके लिए गंभीर आर्थिक और व्यावहारिक परेशानी पैदा करता है। चिमनी ने स्पष्ट किया कि अपीलीय अदालत में हर तारीख पर नायर के वकील उपस्थित रहे और उनकी वजह से कार्यवाही में कभी कोई बाधा या देरी नहीं हुई।
आपराधिक मानहानि मामले की पृष्ठभूमि
यह पूरा विवाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर रवि नायर द्वारा किए गए पोस्ट को लेकर अडाणी एंटरप्राइजेज द्वारा दायर आपराधिक मानहानि की शिकायत से जुड़ा है। कंपनी का आरोप था कि इन पोस्ट्स में कंपनी और अडाणी समूह की छवि को नुकसान पहुंचाने के इरादे से झूठे और अपमानजनक बयान दिए गए थे।
गांधीनगर के ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास ने 10 फरवरी को नायर को मानहानि का दोषी ठहराते हुए एक साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई थी और 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया था।
नायर ने इस दोषसिद्धि के खिलाफ सेशंस कोर्ट में अपील की थी, जहां 9 मार्च को कुछ शर्तों के साथ उनकी सजा निलंबित कर दी गई थी। इन शर्तों में नियमित रूप से अदालत में पेश होना, विदेश जाने से पहले अनुमति लेना, पासपोर्ट जमा करना और बिना पूर्व सूचना के अपना मोबाइल नंबर या आवासीय पता न बदलना शामिल था।

