मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मोटर दुर्घटना मुआवजे की राशि प्राप्त करने या उसकी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराने के लिए दावेदारों को यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (UBI) में खाता खोलने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। दावेदार किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक में अपने खाते के माध्यम से मुआवजा प्राप्त कर सकते हैं।
हाईकोर्ट की इंदौर पीठ के जस्टिस विनय सराफ ने 29 अक्टूबर के आदेश में नीमच जिले के मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) के उन आदेशों को रद्द कर दिया, जिनमें मुआवजा प्राप्त करने के लिए यूनियन बैंक में खाता रखना अनिवार्य किया गया था।
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि दावेदार किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक की शाखा में खाता खोल सकते हैं। खाते का विवरण उपलब्ध कराने के बाद संबंधित अधिकरण को मुआवजे की राशि सीधे उसी खाते में ट्रांसफर करनी होगी।
मुआवजे के भुगतान को लेकर विवाद
यह मामला एक महिला और अन्य दावेदारों की याचिकाओं से जुड़ा था। उन्होंने नीमच के मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के 31 जुलाई और 5 अगस्त के आदेशों को चुनौती दी थी।
अधिकरण ने मुआवजे की राशि फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद (FDR) के रूप में प्राप्त करने के लिए यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में खाता रखने की शर्त लगाई थी। इसके लिए अधिकरण ने हाईकोर्ट की ऑनलाइन डैशबोर्ड के माध्यम से मुआवजा वितरण संबंधी प्रक्रिया का हवाला दिया था।
दावेदारों की ओर से अधिवक्ता अखिल गोधा ने दलील दी कि न तो सुप्रीम कोर्ट और न ही मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मुआवजे के भुगतान के लिए केवल यूनियन बैंक में खाता खोलने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि राशि किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक के खाते में जमा की जा सकती है।
ऑनलाइन डैशबोर्ड से जुड़ा होने के कारण बैंक खाता अनिवार्य नहीं
हाईकोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश की ओर से जारी निर्देशों, रजिस्ट्रार जनरल द्वारा बताई गई प्रक्रिया और रजिस्ट्रार (न्यायिक) तथा रजिस्ट्रार (आईटी) के स्पष्टीकरणों की जांच की।
अदालत ने पाया कि इनमें ऐसा कोई निर्देश नहीं है, जिसके तहत मुआवजे की राशि प्राप्त करने या उसकी फिक्स्ड डिपॉजिट कराने के लिए यूनियन बैंक में खाता खोलना जरूरी हो।
हाईकोर्ट ने अप्रैल 2025 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा मोटर दुर्घटना मुआवजे के वितरण को लेकर जारी निर्देशों का भी उल्लेख किया। इन निर्देशों के अनुसार, अधिकरण में जमा मुआवजे की राशि सामान्यतः सीधे उस व्यक्ति के बैंक खाते में भेजी जानी चाहिए, जो उसे प्राप्त करने का हकदार है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि उस समय फिक्स्ड डिपॉजिट बनाने के लिए ऑनलाइन डैशबोर्ड से केवल यूनियन बैंक ऑफ इंडिया जुड़ा हुआ था। हालांकि, इस तकनीकी व्यवस्था के कारण दावेदारों के लिए उसी बैंक में खाता खोलना अनिवार्य नहीं हो जाता।
इन तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने अधिकरण के आदेशों को रद्द करते हुए स्पष्ट किया कि दावेदार किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक की शाखा में अपना खाता रख सकते हैं और संबंधित अधिकरण को उसी खाते में मुआवजे की राशि ट्रांसफर करनी होगी।
