देश की न्यायिक प्रणाली को आधुनिक और तकनीक-संपन्न बनाने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा कदम उठाया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने देश भर की अदालतों के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) का कायाकल्प करने के लिए एक ‘न्यायिक अवसंरचना सलाहकार समिति’ (Judicial Infrastructure Advisory Committee) के गठन की घोषणा की है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार की अध्यक्षता वाला यह हाई-पावर पैनल भारत की अदालतों को 21वीं सदी की जरूरतों के अनुरूप ढालने के लिए एक विस्तृत ब्लूप्रिंट तैयार करेगा।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य केवल अदालतों की इमारतों को सुधारना नहीं है, बल्कि एक ‘एकीकृत पारिस्थितिकी तंत्र’ (Unified Ecosystem) तैयार करना है, जो जिला अदालतों से लेकर हाई कोर्ट तक समान रूप से प्रभावी हो। यह कमेटी एक महत्वपूर्ण वित्तीय भूमिका भी निभाएगी—इसकी सिफारिशों के आधार पर ही मुख्य न्यायाधीश केंद्र और राज्य सरकारों से आवश्यक बजट और फंड की मांग करेंगे।
तकनीक और डिजिटलीकरण पर जोर
अदालतों में मुकदमों के बढ़ते बोझ को कम करने के लिए यह समिति सात प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगी। इस विजन के केंद्र में ‘ई-कोर्ट्स’ (e-courts) पहल है, जिसका लक्ष्य न्यायपालिका के भीतर डिजिटल अंतर को खत्म करना है।
आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से न केवल कागजी कार्रवाई कम होगी, बल्कि मामलों के निपटारे की गति में भी तेजी आएगी। योजना के तहत ऐसे ‘मॉडर्न कोर्ट कॉम्प्लेक्स’ बनाने का प्रस्ताव है जो तकनीकी रूप से उन्नत हों और जहां वकीलों व आम जनता के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं मौजूद हों।
विशेषज्ञों और जजों की टीम संभालेगी कमान
इस सुधार प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए समिति में अनुभवी न्यायिक हस्तियों और प्रशासनिक विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। जस्टिस अरविंद कुमार के नेतृत्व वाले इस पैनल के अन्य सदस्य निम्नलिखित हैं:
- जस्टिस देबांशु बसाक (कलकत्ता हाई कोर्ट)
- जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा (पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट)
- जस्टिस सोमशेखर सुंदरेशन (बॉम्बे हाई कोर्ट)
- महानिदेशक, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD)
- महासचिव, सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट के महासचिव द्वारा जारी बयान के अनुसार, यह पैनल उन व्यवस्थागत बाधाओं की पहचान करेगा जो वर्तमान में न्याय वितरण में देरी का कारण बनती हैं।
समिति अपनी विस्तृत रिपोर्ट मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को सौंपेगी। रिपोर्ट की समीक्षा के बाद, CJI स्वयं केंद्र और राज्य सरकारों के साथ उच्च स्तरीय बातचीत का नेतृत्व करेंगे ताकि इस ब्लूप्रिंट को आवश्यक राजनीतिक और वित्तीय समर्थन मिल सके।
इस कदम के जरिए सुप्रीम कोर्ट ‘टुकड़ों में होने वाले सुधारों’ के बजाय पूरे भारत के लिए एक मानक (Pan-India Standard) स्थापित करना चाहता है, जिससे न्याय पाना हर नागरिक के लिए सुलभ और आधुनिक हो सके।

