दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को प्रशासनिक पारदर्शिता पर जोर देते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने केंद्र सरकार के उस निर्णय को रद्द कर दिया है, जिसमें ‘द वायर’ के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन के ‘पर्सन ऑफ इंडियन ओरिजिन’ (PIO) स्टेटस को ‘ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया’ (OCI) में बदलने की अर्जी खारिज कर दी गई थी।
जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने अमेरिकी पत्रकार सिद्धार्थ वरदराजन के आवेदन को बहाल करते हुए कहा कि सरकार के इनकार में किसी भी आधार या कारण का उल्लेख नहीं था। अदालत ने अब संबंधित अधिकारियों को इस मामले पर पुनर्विचार करने और कानून के दायरे में एक “तर्कसंगत आदेश” (Reasoned Order) जारी करने का निर्देश दिया है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस कौरव ने पाया कि वरदराजन को भेजे गए आधिकारिक संवाद में इस बात का कोई स्पष्ट कारण नहीं दिया गया था कि उनके अनुरोध को क्यों ठुकराया गया।
अदालत ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा, “जब तक प्रतिवादी (सरकार) कारण स्पष्ट नहीं करता, तब तक अपीलीय अदालत मामले की समीक्षा नहीं कर सकती।” प्रशासनिक निर्णयों में पारदर्शिता की आवश्यकता पर बल देते हुए न्यायाधीश ने कहा कि किसी भी आदेश के पीछे के कारण उसकी “दिल और आत्मा” होते हैं।
केंद्र सरकार की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने निर्देश लेने के लिए और समय की मांग की थी, लेकिन अदालत ने इसे अस्वीकार कर दिया। जस्टिस कौरव ने कहा कि मौजूदा इनकार को बरकरार नहीं रखा जा सकता और सरकार को इस पर फिर से विचार करना होगा।
यह कानूनी विवाद तब शुरू हुआ जब 2 अप्रैल को केंद्र ने वरदराजन के ओसीआई कन्वर्जन के आवेदन को ठुकरा दिया था। वरदराजन के वरिष्ठ वकील ने अदालत को बताया कि अमेरिकी नागरिक होने के बावजूद उनकी जड़ें भारत में गहरी हैं। उनके माता-पिता भारतीय थे, उनकी पत्नी भारतीय नागरिक हैं और वे 1995 से लगातार भारत आते-जाते रहे हैं।
गौरतलब है कि 2015 के बाद भारत सरकार ने सभी पीआईओ (PIO) कार्डों को ओसीआई (OCI) में परिवर्तित मान लिया था। हालांकि, वरदराजन का कार्ड 2032 तक वैध होने के बावजूद ‘मशीन रीडेबल’ (मशीन द्वारा पढ़े जाने योग्य) नहीं था। इसी तकनीकी बाधा के कारण उन्हें औपचारिक रूप से कन्वर्जन के लिए आवेदन करना पड़ा था, जिसे बिना किसी स्पष्टीकरण के खारिज कर दिया गया।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में सरकार के नए आदेश से वरदराजन को कोई शिकायत होती है, तो उनके पास कानूनी उपचार का अधिकार सुरक्षित रहेगा।
फिलहाल यह मामला पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। अदालत बुधवार को एक अलग याचिका पर सुनवाई करेगी, जिसमें वरदराजन ने विदेश यात्रा की अनुमति मांगी है। केंद्र सरकार को इस विशेष पहलू पर भी अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है।

