₹2,700 करोड़ का कोयला घोटाला: ‘किंगपिन’ अनूप माझी की जमानत पर संकट? सुप्रीम कोर्ट ने ED की याचिका पर मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने करोड़ों रुपये के कोयला घोटाले और धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले में आरोपी अनूप माझी को मिली राहत की समीक्षा करने का फैसला किया है। मंगलवार को शीर्ष अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें माझी की अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग की गई है।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने इस मामले में अनूप माझी को औपचारिक नोटिस जारी कर उनका जवाब मांगा है। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई सितंबर में होगी।

जांच एजेंसी ED की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने अदालत में कड़ा रुख अपनाते हुए अनूप माझी को इस पूरे घोटाले का ‘किंगपिन’ (मुख्य सूत्रधार) करार दिया। उन्होंने दलील दी कि यह केवल चोरी का मामला नहीं है, बल्कि ₹2,700 करोड़ से अधिक की राष्ट्रीय संपत्ति की सोची-समझी लूट है।

ED का आरोप है कि ईस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड (ECL) के पट्टा क्षेत्रों से अवैध रूप से कोयला निकाला गया और उसकी तस्करी की गई। एजेंसी के अनुसार, इस पूरे फर्जीवाड़े की कुल राशि लगभग ₹2,742.32 करोड़ है।

सुनवाई के दौरान जब ED ने माझी के लंबे समय तक फरार रहने की बात कही, तो पीठ ने एक अहम सवाल उठाया। अदालत ने पूछा, “जब आरोपी सीबीआई की हिरासत में था, तो उस समय ईडी ने उसे अपनी कस्टडी में क्यों नहीं लिया?”

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इसके जवाब में जांच एजेंसी ने कहा कि अदालत से सुरक्षा मिलने के बाद ही आरोपी ने जांच में कुछ हद तक सहयोग करना शुरू किया है।

दूसरी ओर, अनूप माझी के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने ED के दावों का खंडन किया। उन्होंने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल जांच में पूरी तरह सहयोग कर रहे हैं और अब तक 13 बार जांच एजेंसी के सामने पेश हो चुके हैं। बचाव पक्ष का तर्क है कि जब आरोपी खुद जांच में शामिल हो रहा है, तो उसे हिरासत में लेकर पूछताछ करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

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यह मामला साल 2020 में दर्ज की गई एक एफआईआर से जुड़ा है। आरोप है कि एक निजी कंपनी के माध्यम से अवैध खनन और कोयले की हेराफेरी कर करोड़ों रुपये का गबन किया गया। दिल्ली हाईकोर्ट ने पिछले साल जून में माझी को गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान की थी, जिसे अब ED ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

सितंबर में होने वाली सुनवाई यह तय करेगी कि करोड़ों के इस कथित घोटाले में आरोपी की जमानत बरकरार रहेगी या उसे हिरासत में भेजकर पूछताछ की जाएगी।

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