छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 26 वर्षीय एक युवक की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने अपनी 22 वर्षीय पत्नी को वापस बुलाने और वैवाहिक संबंध बहाल करने की गुहार लगाई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पति का बार-बार ससुराल जाना या कानूनी नोटिस भेजना इस बात का प्रमाण नहीं है कि पत्नी बिना किसी ठोस कारण के अलग रह रही है।
जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की बेंच ने इस मामले में नवंबर 2023 के फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। फैमिली कोर्ट ने भी पति की अर्जी ठुकरा दी थी। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पत्नी के जरूरी शैक्षणिक और निजी दस्तावेज अपने पास दबाकर रखने के रवैये पर भी पति को फटकार लगाई और इसे रिश्ते में तनाव का एक बड़ा आधार माना।
बेंच ने 18 सितंबर को दिए अपने आदेश में कहा कि पति द्वारा बार-बार ससुराल जाने या दांपत्य जीवन फिर से शुरू करने के लिए कानूनी नोटिस भेजने भर से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि पत्नी बिना किसी वाजिब वजह के साथ रहने से इनकार कर रही है। अदालत ने कहा कि ऐसे कदमों को अलग-थलग करके नहीं देखा जा सकता, बल्कि इन्हें पति-पत्नी के बीच बने हालातों और रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों के आधार पर ही समझा जाना चाहिए।
दस्तावेज लौटाने से इनकार करना भी अहम पहलू
अदालत ने इस बात को गंभीरता से लिया कि बार-बार मांगने के बावजूद पति ने महिला के शैक्षणिक प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, जाति प्रमाण पत्र और बैंक पासबुक अपने पास रख लिए। हाईकोर्ट ने कहा कि इन अहम दस्तावेजों को न लौटाना एक ऐसा परिस्थितिगत साक्ष्य है, जिसे रिश्ते के बिखराव का आकलन करते समय नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
इसके साथ ही कोर्ट ने पाया कि पत्नी की ओर से लगाए गए शारीरिक शोषण, क्रेटा कार व 5 लाख रुपये नकद की मांग, गर्भपात से जुड़े हालात और घरेलू हिंसा के मामले इतने गंभीर हैं कि महिला के अलग रहने के फैसले को वाजिब ठहराते हैं। इन सभी पहलुओं को एक साथ देखने पर यह स्पष्ट होता है कि महिला के पास अलग रहने का पर्याप्त कारण था।
दहेज प्रताड़ना और मारपीट का आरोप
दोनों का विवाह फरवरी 2022 में हुआ था। पत्नी की ओर से पैरवी कर रही वकील मधुनिषा सिंह ने अदालत में बताया कि उनकी मुवक्किल बिना किसी कारण के अलग नहीं रह रही है, बल्कि ससुराल में लगातार हो रहे दुर्व्यवहार, मारपीट और दहेज की मांगों के चलते उसे अपने माता-पिता के घर शरण लेनी पड़ी।
महिला का आरोप था कि शादी में उसके परिवार ने स्विफ्ट कार दी थी, जिसे ससुराल वालों ने सस्ती गाड़ी बताकर खारिज कर दिया। शादी के महज एक हफ्ते बाद ही पति, सास-ससुर, जेठ और मामा 5 लाख रुपये नकद और क्रेटा कार की मांग करने लगे। महिला ने यह भी बताया कि 19 फरवरी 2022 को पति और ससुराल के लोगों ने उसके साथ गंभीर मारपीट और बदसलूकी की, जिसके कारण उसका गर्भपात हो गया। इसके अलावा उसने पति के किसी अन्य महिला से अवैध संबंध होने और उसके फोन में आपत्तिजनक तस्वीरें व संदेश देखने का आरोप भी लगाया। महिला का कहना था कि जब उसने इस बारे में सवाल किया, तो उसे पीटा गया और धमकियां दी गईं।
पति ने आरोपों को बताया मनगढ़ंत
दूसरी तरफ, पति की ओर से पेश वकील नवनीत कुमार यादव ने दलील दी कि दहेज, मारपीट और प्रताड़ना के सारे आरोप झूठे, मनगढ़ंत और बिना किसी सबूत के बाद में गढ़े गए हैं। पति का कहना था कि वह हमेशा अपने वैवाहिक दायित्व निभाने को तैयार रहा और रिश्ते को बचाने की हर संभव कोशिश की, लेकिन पत्नी ने साथ रहने से इनकार कर दिया।
पति के अनुसार, अक्टूबर 2022 तक उनका दांपत्य जीवन सामान्य था। इसके बाद पत्नी अपनी मां की बीमारी की सूचना मिलने पर मायके चली गई। तीन दिन बाद जब वह उसे लेने गया और बाद में दिवाली के बाद फिर बुलाने पहुंचा, तो उसने उसके कार्यस्थल पर साथ जाने से मना कर दिया। पति का दावा था कि वह कई बार ससुराल गया, लेकिन पत्नी ने लौटने से साफ इनकार कर दिया, अभद्र व्यवहार किया और परिवार को झूठे केस में फंसाने की धमकी दी।
पति ने पत्नी को वापस लाने के लिए पहले भी एक अर्जी दाखिल की थी, जिसे मार्च 2023 में खारिज कर दिया गया था। इसके बाद भेजा गया कानूनी नोटिस भी बेअसर रहा।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि पति यह साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा कि पत्नी बिना किसी उचित कारण के उससे दूर रह रही है। इसके साथ ही कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश पर मुहर लगाते हुए पति की अपील खारिज कर दी।

