सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को हवाई किराए में करीब 700 प्रतिशत बढ़ोतरी का आरोप लगाने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि किराया इतना अधिक है तो हवाई यात्रा न करें।
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की पीठ के समक्ष एक वकील ने मामले का उल्लेख करते हुए जल्द सुनवाई की मांग की।
वकील ने दलील दी कि विमान किराए में 700 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस पर पीठ ने कहा, “हवाई यात्रा मत कीजिए।”
वकील ने जवाब दिया कि हवाई यात्रा एक आवश्यक सेवा है और किराए में इस तरह की बढ़ोतरी संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता का अधिकार देता है।
हवाई किराए पर नियंत्रण से जुड़ी दूसरी याचिका भी लंबित
सुप्रीम कोर्ट पहले से ही हवाई किराए में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव से संबंधित एक अन्य याचिका पर सुनवाई कर रहा है। यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन ने दाखिल की है।
याचिका में नागरिक उड्डयन क्षेत्र में पारदर्शिता और यात्रियों के हितों की सुरक्षा के लिए एक मजबूत एवं स्वतंत्र नियामक व्यवस्था बनाने की मांग की गई है। इसके अलावा निजी एयरलाइंस द्वारा टिकट की कीमतों और अतिरिक्त शुल्क में अप्रत्याशित बदलाव को नियंत्रित करने के लिए दिशानिर्देश बनाने का अनुरोध किया गया है।
जनवरी में इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विशेष रूप से त्योहारों के समय विमान किराए में भारी बढ़ोतरी पर चिंता जताई थी। कोर्ट ने अत्यधिक किराया वसूलने को यात्रियों का शोषण बताया था और कहा था कि वह हवाई किराए में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव के मुद्दे पर हस्तक्षेप करेगा।
कोर्ट ने केंद्र सरकार और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को याचिका पर जवाब दाखिल करने का निर्देश भी दिया था।
इससे पहले पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा था।
नए विमानन कानून के तहत नियम बनाने की प्रक्रिया
हवाई किराए से जुड़े मामले में केंद्र सरकार ने 16 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत बनाए जाने वाले नियमों को प्रशासनिक मंजूरी मिल चुकी है। सरकार के अनुसार, इन नियमों के दो सप्ताह के भीतर प्रकाशित होने की संभावना थी।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को निर्देश दिया कि वह प्रकाशित नियमों को अगली सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष पेश करें। मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को निर्धारित है।
इससे पहले 17 अगस्त को केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया था कि भारत के विमानन क्षेत्र के आधुनिकीकरण के उद्देश्य से बनाए गए भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत नियम तैयार करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
हवाई किराए में अप्रत्याशित बढ़ोतरी और उसके नियमन से संबंधित दूसरी याचिका फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
