कलकत्ता हाईकोर्ट ने SAIL-CMO रिटायर्ड कर्मचारियों की उच्च पेंशन अर्जी खारिज करने वाला EPFO का आदेश रद्द किया

कलकत्ता हाईकोर्ट ने स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) की सेंट्रल मार्केटिंग ऑर्गनाइजेशन (CMO) इकाई के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उच्च पेंशन देने से इनकार करने वाले EPFO के आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि EPFO ने उच्च पेंशन विकल्प से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के 2022 के फैसले की गलत व्याख्या की और लाभकारी कानून की भावना के खिलाफ काम किया।

न्यायमूर्ति शंपा दत्त (पॉल) ने 14 नवंबर को अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि जिन कर्मचारियों ने 31 जनवरी 2025 या EPFO द्वारा दी गई किसी आगे की समय-सीमा के भीतर संयुक्त विकल्प प्रस्तुत किया है, उनकी अर्जी स्वीकार की जाएगी।

याचिकाकर्ता SAIL-CMO के वे रिटायर्ड कर्मचारी थे जिनकी संयुक्त विकल्प अर्जी EPFO ने 5 फरवरी 2025 को यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि ट्रस्ट नियम उच्च पेंशन की अनुमति नहीं देते। कर्मचारी 58 वर्ष की आयु में एक ऐसे प्रतिष्ठान से सेवानिवृत्त हुए थे जिसे Employees’ Provident Funds Act, 1952 की धारा 17(1) के तहत छूट प्राप्त है।

कर्मचारियों ने बताया कि SAIL-CMO PF ट्रस्ट ने 4 अक्टूबर 2024 को EPFO को संशोधित नियम भेजे थे, लेकिन EPFO ने 21 जनवरी 2025 के पत्र में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के 4 नवंबर 2022 के फैसले के बाद ट्रस्ट नियमों में किसी भी संशोधन की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसके बाद उसी आधार पर संयुक्त विकल्प खारिज कर दिए गए।

अदालत ने PF प्राधिकरण द्वारा 18 जनवरी 2025 को जारी स्पष्टीकरण को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के “पूरी तरह खिलाफ” बताया। न्यायमूर्ति दत्त (पॉल) ने कहा कि EPFO ने फैसले की अपनी व्याख्या लागू की है, जो “पूरी तरह विरोधाभासी” है।

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अदालत ने EPFO की भूमिका को कठोर शब्दों में आलोचना करते हुए कहा कि प्राधिकरण द्वारा जारी स्पष्टीकरण न केवल मनमाना है बल्कि लाभकारी सामाजिक कल्याण कानून के उद्देश्य को ही विफल कर देता है।

न्यायमूर्ति दत्त (पॉल) ने कहा कि EPFO “किसी भी तरह लाभ देने से बचने” के लिए यह तक कह रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रस्ट नियमों में संशोधन किया जाए तो भी छूट प्राप्त प्रतिष्ठानों के कर्मचारियों को उच्च पेंशन नहीं मिलेगी। अदालत ने इसे “अस्वीकार्य”, प्राकृतिक न्याय के खिलाफ और “कानून की प्रक्रिया का स्पष्ट दुरुपयोग” बताया।

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हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि कर्मचारी जब भी पेंशन फंड में अंतर राशि और लागू ब्याज जमा कर देंगे, EPFO उन्हें अगले महीने से उच्च पेंशन देना शुरू करेगा।

याचिकाकर्ताओं ने बताया कि देशभर में लगभग 1,300 छूट प्राप्त प्रतिष्ठान हैं, जिनमें से 16 SAIL के अंतर्गत आते हैं। उनका कहना था कि Employees’ Pension Scheme, 1995 के तहत पेंशन का प्रबंधन EPFO ही करता है, चाहे प्रतिष्ठान छूट प्राप्त हो या न हो। ऐसे में संयुक्त विकल्प खारिज करने का कोई कानूनी आधार नहीं था।

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