हाइकोर्ट ने कहा, लोकतंत्र में न्यायपालिका आलोचना के लिए खुली है

बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक महिला द्वारा दायर याचिका पर अंतिम दलीलें सुनने के दौरान कहा लोकतंत्र में न्यायपालिका आलोचना के लिए खुली है एवं कोर्ट के अवमानना” अंतिम उपाय या हथियार होना चाहिए” 

आपको बता दें याचिका दायर करने वाली महिला के खिलाफ मुख्यमंत्री उध्दव ठाकरे और उनके बेटे आदित्य ठाकरे के खिलाफ ट्वीट को लेकर मामला दर्ज किया गया है।

मुम्बई पुलिस ने सुनैना होले के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी ,महिला ने हाइकोर्ट के समक्ष प्रथमिकी को खारिज करने की गुहार लगाई है।

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हाइकोर्ट के जस्टिस एसएस सिंदे और जस्टिस एमएस कार्णिक की बेंच ने कहा” लोकतांत्रिक व्यवस्था में हमे ज्ञात है कि आलोचना होगी । न्यायपालिका में भी हम इसके लिए खुले हैं । अवमानना अंतिम उपाय या हथियार है। यह मेरा निजी विचार है।

महिला सुनैना होले के पक्षकार वकील चंद्रचूर्ण ने कोर्ट से कहा की प्राथमिकी में कोई अपराध का जिक्र नही है। महाराष्ट्र सरकार की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज मोहित ने तर्क दिया की आपत्तिजनक टिप्पणीयों ,ट्वीट आदि के मामलों में संबंधित व्यक्ति के इरादे पर गौर करना चाहिए।

कोर्ट नव कहा भारत के नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार है। लवकिं उन्हें दूसरों के अधिकारों के उल्लंघन किये बगैर अपने अधिकार का प्रयोग करना चाहिए ।

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