साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े ‘बड़ी साजिश’ (larger conspiracy) मामले में आरोपी सलीम मलिक को बड़ी राहत मिली है। दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को कड़े आतंकवाद विरोधी कानून, गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत दर्ज इस मामले में मलिक को जमानत दे दी। सलीम मलिक जून 2020 से ही न्यायिक हिरासत में थे।
यह फैसला दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की बेंच ने सुनाया। मलिक ने निचली अदालत के 29 जनवरी के उस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया गया था।
सह-आरोपियों के साथ समानता के आधार पर मिली राहत
अदालती कार्यवाही के दौरान सलीम मलिक के वकीलों ने समानता के सिद्धांत (principle of parity) को अपनी दलीलों का मुख्य आधार बनाया। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में उनके मुवक्किल जैसी ही कानूनी स्थिति वाले दो सह-आरोपियों—मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद—को जमानत दे दी है। ऐसे में समानता के आधार पर सलीम मलिक भी जमानत के हकदार हैं।
दूसरी तरफ, जांच एजेंसियों और अभियोजन पक्ष का आरोप है कि सलीम मलिक फरवरी 2020 में भड़के दंगों के मुख्य साजिशकर्ताओं (masterminds) में से एक थे। पुलिस के अनुसार, वह नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के विरोध में आयोजित एक बैठक के उन 11 कथित आयोजकों और वक्ताओं में शामिल थे, जिसके बाद हिंसा भड़की थी।
गौरतलब है कि फरवरी 2020 में सीएए और एनआरसी के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों के दौरान भड़की इस सांप्रदायिक हिंसा में 53 लोगों की जान चली गई थी, जबकि 700 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।
दिल्ली दंगा साजिश मामले के कानूनी उतार-चढ़ाव
इस पूरे मामले में अलग-अलग अदालतों के फैसलों ने इस कानूनी लड़ाई को काफी संवेदनशील बना दिया है।
इसी साल 5 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले के पांच प्रमुख आरोपियों को राहत देते हुए जमानत मंजूर की थी। इन आरोपियों में शामिल हैं:
- गुलफिशा फातिमा
- मीरां हैदर
- शिफा उर रहमान
- मोहम्मद सलीम खान
- शादाब अहमद
हालांकि, शीर्ष अदालत ने सभी आरोपियों को एक समान मानने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि इस साजिश मामले के सभी आरोपी एक ही कानूनी धरातल पर खड़े नहीं हैं। इसी टिप्पणी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने छात्र कार्यकर्ताओं उमर खालिद और शारजील इमाम की जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया था।
इससे पहले कानूनी सफर में आरोपियों को विभिन्न अदालती आकलनों का सामना करना पड़ा है। सुप्रीम कोर्ट के जनवरी के आदेश से पहले, 2 सितंबर 2025 को दिल्ली हाई कोर्ट के ही जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस शालिंदर कौर की बेंच ने उमर खालिद, शारजील इमाम और मीरां हैदर समेत कई अन्य सह-आरोपियों की जमानत याचिकाओं को नामंजूर कर दिया था।
अब जब हाई कोर्ट ने सलीम मलिक की रिहाई का रास्ता साफ कर दिया है, तब इस जटिल कानूनी मामले का केंद्र बिंदु एक बार फिर निचली अदालत (trial court) पर टिक गया है, जहां बाकी आरोपियों के खिलाफ मुकदमा आगे बढ़ेगा।

