एशियाटिक सोसाइटी चुनाव का रास्ता साफ: बॉम्बे हाईकोर्ट ने कुमार केतकर और अन्य की याचिकाएं खारिज कीं

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एशियाटिक सोसाइटी ऑफ मुंबई के आगामी चुनावों में आ रही कानूनी बाधाओं को दूर कर दिया है। कोर्ट ने उन याचिकाओं को खारिज कर दिया है जिनमें चैरिटी कमिश्नर के हस्तक्षेप को चुनौती दी गई थी। जस्टिस फरहान दुबाश ने गुरुवार को अपने फैसले में कहा कि संस्थागत अनियमितताओं की रिपोर्टों के बाद ‘फिट पर्सन’ नियुक्त करने और नई मतदाता सूची तैयार करने के कमिश्नर के आदेश में कोई “स्पष्ट अवैधता या मनमानापन” नहीं है।

1804 में स्थापित एशियाटिक सोसाइटी ऑफ मुंबई, शहर की सबसे पुरानी सार्वजनिक शोध लाइब्रेरी में से एक है। सितंबर 2023 में हुए पिछले चुनावों के बाद से ही संस्था प्रशासनिक विवादों में घिरी रही है। नवंबर 2025 के लिए निर्धारित चुनावों को मतदाता सूची की वैधता पर विवाद के कारण बार-बार स्थगित करना पड़ा।

यह मामला तब और गंभीर हो गया जब महाराष्ट्र विधानमंडल में सोसाइटी के कामकाज को लेकर चिंता जताई गई, जिसके बाद इसकी जांच शुरू हुई। चैरिटी कमिश्नर द्वारा नियुक्त इंस्पेक्टर ने फरवरी और मार्च 2026 में अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें कई गंभीर खामियां उजागर हुईं। रिपोर्ट में 2,000 से अधिक किताबों के गायब होने और 3 अक्टूबर 2025 की कट-ऑफ तारीख के बाद 1,465 नए सदस्यों को नियमों के खिलाफ शामिल करने की बात कही गई। इन्ही निष्कर्षों के आधार पर, चैरिटी कमिश्नर ने 13 मार्च 2026 को दैनिक कार्यों की देखरेख के लिए एक ‘फिट पर्सन’ नियुक्त किया और पारदर्शी चुनाव के लिए नई मतदाता सूची तैयार करने का आदेश दिया।

वरिष्ठ पत्रकार और पूर्व राज्यसभा सांसद कुमार केतकर सहित अन्य याचिकाकर्ताओं ने चैरिटी कमिश्नर के अधिकार क्षेत्र को चुनौती दी थी। उनकी दलील थी कि कमिश्नर को सोसाइटी की आंतरिक चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने या मौजूदा मतदाता सूची को रद्द करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। याचिकाकर्ताओं ने कमिश्नर के निर्देशों पर रोक लगाने की मांग की और तर्क दिया कि 14 मार्च 2026 की प्रस्तावित चुनाव तिथि को बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के अनुमति दी जानी चाहिए थी।

जस्टिस फरहान दुबाश ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों को अस्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि चैरिटी कमिश्नर ने अपनी वैधानिक शक्तियों के भीतर काम किया है। कोर्ट ने गौर किया कि इंस्पेक्टर की रिपोर्ट में दर्ज “2,000 से अधिक किताबों का गायब होना” और अचानक करीब 1,500 नए सदस्यों का प्रवेश एक गंभीर विषय है। संस्था की गरिमा और अखंडता बनाए रखने के लिए ऐसे प्रशासनिक हस्तक्षेप की आवश्यकता थी।

हाईकोर्ट ने सोसाइटी की ‘स्क्रूटिनाइजिंग कमेटी’ (जांच समिति) के कामकाज पर भी सवाल उठाए। फैसले में कहा गया कि यह समिति अपना कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी काम करती रही और चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद 1,400 से अधिक नए सदस्यों की सिफारिश की। कोर्ट के अनुसार, इससे मतदाता सूची की शुचिता पर संदेह पैदा होता है। जस्टिस दुबाश ने कहा कि चुनाव निष्पक्ष और उचित पर्यवेक्षण में हों, यह सुनिश्चित करने के लिए कमिश्नर का आदेश एक आवश्यक कदम था।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए चैरिटी कमिश्नर के उस आदेश की पुष्टि की है, जिसमें ‘फिट पर्सन’ की नियुक्ति और मतदाता सूची को नए सिरे से तैयार करने की बात कही गई थी। कोर्ट ने फैसले पर रोक लगाने के याचिकाकर्ताओं के अनुरोध को भी नामंजूर कर दिया, जिससे अब पर्यवेक्षण के तहत चुनाव कराने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

READ ALSO  सदी पुराना भूमि अनुदान, अब RTI के दायरे में: कर्नाटक हाईकोर्ट ने बेंगलुरु के सेंचुरी क्लब को माना "लोक प्राधिकरण"
Ad 20- WhatsApp Banner

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles