किरायेदार की पर्यावरण गड़बड़ियों के लिए मकान मालिक जिम्मेदार नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की प्रदूषण बोर्ड की याचिका

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि किराये की जगह पर चल रही केमिकल यूनिट द्वारा किए गए पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन के लिए मकान मालिक को दोषी नहीं माना जा सकता। जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ ने गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जीपीसीबी) की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के फैसले को चुनौती दी गई थी। एनजीटी ने अपने फैसले में सूरत के एक मकान मालिक पर लगाए गए 25 लाख रुपये के जुर्माने को रद्द कर दिया था।

विवाद की शुरुआत

यह मामला सूरत का है, जहां अक्टूबर 2021 में जीपीसीबी ने जगमोहन लाचीराम जालान नामक व्यक्ति की जमीन पर चल रही डाई-इंटरमीडिएट केमिकल फैक्ट्री को बंद करने का आदेश दिया था। बोर्ड की जांच टीम ने पाया कि यह फैक्ट्री बिना जरूरी मंजूरी और लाइसेंस के चलाई जा रही थी। इसके अलावा, फैक्ट्री से निकलने वाला दूषित रासायनिक पानी तय सुरक्षा मानकों से कहीं ज्यादा खतरनाक था। इसी आधार पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मकान मालिक पर 25 लाख रुपये का अंतरिम पर्यावरणीय जुर्माना ठोक दिया था।

मकान मालिक की दलील

मकान मालिक जालान ने इस जुर्माने का विरोध करते हुए कहा कि उन्होंने साल 2020 में एक वैध समझौते के तहत यह जगह एक निजी कंपनी के निदेशक को किराये पर दी थी। उन्हें इस बात की जरा भी भनक नहीं थी कि उनके परिसर में बिना लाइसेंस के रसायनों का अवैध कारोबार किया जा रहा है। गड़बड़ी की जानकारी मिलते ही जालान ने किरायेदार के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और मामले को लेकर हाईकोर्ट पहुंचे।

एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट का रुख

हाईकोर्ट ने प्रदूषण बोर्ड को इस मामले पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया था, लेकिन बोर्ड ने साल 2024 में अपना पुराना फैसला दोहराते हुए मकान मालिक पर जुर्माना बरकरार रखा। इसके खिलाफ जालान ने एनजीटी का रुख किया। एनजीटी ने 14 नवंबर 2025 को अपने आदेश में स्पष्ट किया कि किरायेदार के व्यवसाय द्वारा किए गए नियमों के उल्लंघन के लिए मकान मालिक से मुआवजा नहीं वसूला जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने अब एनजीटी के इसी आदेश में दखल देने से इनकार करते हुए साफ कर दिया है कि किरायेदारों की पर्यावरण संबंधी गलतियों के लिए संपत्ति के मालिक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाएगा।

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